प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक व कर्मचारियों को जनगणना कार्य में नहीं लगाया जा सकता। भले ही ये राजकीय सहायता प्राप्त हों अथवा नहीं। सरकार को जनगणना कानून में स्थानीय प्राधिकारी के कर्मचारियों की सेवाएं जनगणना में लेने की अनुमति दी गई है, किंतु ये संस्थाएं स्थानीय प्राधिकारी के अंतर्गत नहीं आती हैं।
कोर्ट ने जनगणना में शामिल करने के लिए ग्रेटर नोएडा के निजी कालेजों व स्कूलों के कर्मचारी तथा शिक्षकों की आठ व 29 अप्रैल 2026 को मांगी गई सूची के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार से चार हफ्ते में याचिका पर जवाब मांगा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने इंडिपेंडेंट सेल्फ फाइनेंस्ड स्कूल एसोसिएशन गौतमबुद्धनगर की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याची का कहना था कि निजी शिक्षण संस्थान लोकल अथॉरिटी (स्थानीय प्राधिकारी) के अंतर्गत नहीं आते। इसलिए इनके कर्मचारी और अध्यापकों को जनगणना कार्य में नहीं लिया जा सकता।
जनगणना कानून की धारा-4 ए स्थानीय प्राधिकारी के स्टाफ को चुनाव ड्यूटी पर लेने की छूट देती है। कहा कि निजी कालेज लोकल अथारिटी, राज्य कार्यालय और राज्य की सब्सिडियरी कंपनी फर्म नहीं हैं।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 159 ने एडेड, अनएडेड प्राइवेट कॉलेज टीचर्स को लोकल अथॉरिटी से अलग माना है। इसलिए इनके अध्यापकों व स्टाफ से चुनाव ड्यूटी नहीं ली जा सकती।
इंचार्ज अधिकारी के आदेश पर एडीएम ने बीएसए, डीआइओएस व जिला पंचायतराज अधिकारी को पत्र लिखकर कर्मचारी-शिक्षकों की सूची मांगी है। कहा है कि कोई प्रशिक्षण में नहीं जाता तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
दबाव में एसोसिएशन ने सूची दे दी है, लेकिन अब कार्रवाई की आशंका है। इसलिए आदेश पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने कहा अनिवार्य शिक्षा कानून की धारा-27 के अंतर्गत बीएसए कक्षा एक से आठ तक के सरकारी अध्यापकों को छुट्टी के समय जनगणना के लिए भेज सकते हैं, लेकिन प्राइवेट स्कूलों को नहीं भेजा सकते।
