शिक्षक हितों की लड़ाई तेज: UPPSS/TFI का आंदोलन देशभर में हुआ मुखर, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई बनी बड़ी उपलब्धि
लखनऊ: शिक्षक अधिकारों की रक्षा को लेकर UPPSS/TFI का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद से शिक्षकों ने सड़क से लेकर सदन और न्यायालय तक अपनी आवाज बुलंद की है। डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन ने अब राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप ले लिया है।
5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों ने “काला कानून वापस लो” के नारे के साथ विरोध दर्ज कराते हुए शिक्षक दिवस का बहिष्कार किया। इसके बाद 7 सितंबर, 16 सितंबर, 26–28 सितंबर और 5 अक्टूबर तक लगातार ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और बैठकों के माध्यम से आंदोलन को धार दी गई।
आंदोलन को संगठित रूप देने के लिए 25 अक्टूबर 2025 को TFI (टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) का गठन किया गया। इसके बाद 21 नवंबर को रामलीला मैदान में हुई विशाल महारैली और 4 अप्रैल 2026 को आयोजित बड़ी रैली ने शिक्षक एकजुटता की मजबूत तस्वीर पेश की।
इस मुद्दे की गूंज संसद तक भी पहुंची। 4 दिसंबर से शुरू हुए संसद सत्र में इस विषय पर चर्चा हुई और 19 दिसंबर को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के साथ हुई वार्ता के बाद आंदोलन को नई दिशा मिली।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस प्रकरण की सुनवाई ओपन कोर्ट में करने का निर्णय शिक्षकों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। इससे आंदोलन को कानूनी स्तर पर भी मजबूती मिली है।
आंदोलन के दौरान “काला कानून वापस लो”, “No TET before RTE Act”, “शिक्षक एकता जिंदाबाद” जैसे नारों के साथ शिक्षक लगातार अपनी मांगों को लेकर एकजुट दिखाई दे रहे हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उनके अधिकारों की पूरी तरह रक्षा नहीं हो जाती। उनका स्पष्ट संदेश है—“हम संघर्षरत थे, हैं और रहेंगे, और जीत शिक्षक समाज की ही होगी।”

