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Tuesday, June 2, 2026

4 बार ccl निरस्त करने के आरोप में beo निलंबित

 4 बार ccl निरस्त करने के आरोप में beo निलंबित----


श्रीमती कल्पना पाल, प्रधानाध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय, पिपरिया, विकास खण्ड-सौरिख, जनपद कन्नौज के शिकायती पत्र/शपथ पत्र दिनांक 24.04.2026 द्वारा श्री विश्वनाथ पाठक, खण्ड शिक्षा अधिकारी, विकास खण्ड सौरिख, जनपद कन्नौज के विरूद्ध निम्नवत् शिकायतें की गयीः-

2- शिकायतकर्ता के विद्यालय में दिसम्बर, 2025 में मरम्मत कार्य हेतु 4,62,796/- रूपये की धनराशि प्राप्त हुई थी। उक्त धनराशि के सम्बन्ध में खण्ड शिक्षा अधिकारी, सौरिख के द्वारा उन पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 20 प्रतिशत राशि अवैध रूप से देने हेतु दबाव बनाया गया। उक्त अवैध धनराशि को देने से मना करने पर पुनः खण्ड शिक्षा अधिकारी, श्री विश्वनाथ पाठक दिनांक 25.03.2026 को प्राथमिक विद्यालय, बहिनी के शिक्षामित्र श्री गिरजेश सिंह के साथ शिकायतकर्ता के विद्यालय गये एवं उनका उपस्थिति रजिस्टर सीन किया। श्री पाठक द्वारा श्रीमती कल्पना पाल से कहा गया कि मैडम तुम समझती नहीं हो जब तक रूपये नहीं दोगी तब तक तुम्हें ऐसे ही परेशान किया जायेगा, तुमने मरम्मत कार्य अच्छे से करवाया है, फिर भी कमियां निकाली जायेंगी। 20 प्रतिशत में मेरा और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सर का एवं डी०सी० पीयूष सभी का हिस्सा रहेगा, उसके बाद तुम विद्यालय में काम करवाओं या न करवाओं तुम्हे कोई परेशान नहीं करेगा। श्रीमती पाल के द्वारा उक्त धनराशि देने साफ मना किया गया।

3- खण्ड शिक्षा अधिकारी, सौरीख एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, कन्नौज ने मिलकर शिकायतकर्ता द्वारा आवेदित बाल्य देखभाल अवकाश को 4 बार निरस्त किया और लंबित रखा गया। इसी दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, कन्नौज द्वारा BSA Control Room से सुबह-सुबह सहायक अध्यापक को कॉल करके श्रीमती पाल को अनुपस्थित रखा गया, उसके पश्चात् उनके बाल्य देखभाल अवकाश को निरस्त किया गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, कन्नौज एवं खण्ड शिक्षा अधिकारी, सौरीख द्वारा प्री-प्लान करके दिनांक 22.04.2026 को पूरी टीम के साथ श्रीमती पाल के विद्यालय में छापा मारा गया और शिकायतकर्ता के आकस्मिक अवकाश पर होने के कारण स०अ० को मुझे निलंबित करने की धमकी दी गई। श्रीमती कल्पना पाल द्वारा आवेदित बाल्य देखभाल अवकाश को निरस्त करने का विवरण निम्नानुसार है -

(1) श्रीमती कल्पना पाल द्वारा पहला आवेदन दिनांक 12.04.2026 को 15.04.2026 से 14.05. 26 तक किया गया, जिसको दिनांक 15.04.2026 को BSA Control Room से फोन करवाने के बाद अनुपस्थित करके निरस्त किया गया।

(2) श्रीमती कल्पना पाल द्वारा दूसरा आवेदन दिनांक 15.04.2026 को पुनः किया गया, उक्त अवकाश दिनांक 16.04.2026 से दिनांक 15.05.2026 तक का था, जिसे रात्रि 9.50 पर पुनः निरस्त किया गया।

(3) श्रीमती कल्पना पाल द्वारा तीसरा आवेदन दिनांक 16.04.2026 को दिनांक 12.04.2026 से दिनांक 16.05.2025 तक के लिये किया गया था, जिसे दिनांक 16.04.2026 को BSA Control Room के द्वारा अनुपस्थित करके रात्रि 9.50 पर निरस्त किया गया।

(4) श्रीमती कल्पना पाल द्वारा चौथा आवेदन दिनांक 17.04.2026 को दिनांक 18.04.2026 से दिनांक 16.05.2026 तक के लिये किया गया, जिसे दिनांक 18.04.2026 को अनुपस्थित दिखाकर निरस्त किया गया।

(5) खण्ड शिक्षा अधिकारी, सौरिख द्वारा फोन करवाकर श्रीमती पाल को BRC पर बात करने के लिये बुलाया गया, श्रीमती कल्पना पाल के BRC पहुंचने पर खण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा उनसे कहा गया कि देखिए मैडम आप मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती, आजकल पैसे से किसी भी अधिकारी को खरीदा जा सकता है और ईश्वर की कृपा से मैने बहुत रूपया कमाया है और है भी।

4- श्री विश्वनाथ पाठक, खण्ड शिक्षा अधिकारी के द्वारा BRC संचालन में बरती जा रही अनियमितता के संबंध में शिकायतकर्ता द्वारा निम्न बिन्दु प्रकाश में लाये गयेः-

(i) दिनांक 03.11.2025 एवं 04.11.2025 को जिस समय श्रीमती कल्पना पाल CCL पर थी, उसी दौरान सहायक अध्यापक ने दो दिवसीय आकस्मिक अवकाश लिया, उस दौरान विद्यालय का संचालन किसी शिक्षक से नहीं करवाया गया।

(ii) दिनांक 24.11.2025 को भी उपरोक्त की पुनरावृत्ति हुई।

(iii) दिनांक 06.02.2026 को जब श्रीमती कल्पना पाल चिकित्सकीय अवकाश पर थी उसी दौरान सहायक अध्यापक द्वारा CL ली गयी थी, उक्त अवधि में भी BEO की लापरवाही सामने आयी और उनके विद्यालय का संचालन नहीं करवाया गया।

5-श्रीमती कल्पना पाल द्वारा की गयी उपरोक्त शिकायतों के दृष्टिगत निदेशालय के पत्रांक : निरीक्षण / 1046/2026-27, दिनांक 07.05.2026 द्वारा श्री विश्वनाथ पाठक, खण्ड शिक्षा अधिकारी, विकास खण्ड सौरिख, जनपद कन्नौज का स्पष्टीकरण मांगा गया, जिसके कम में श्री पाठक के कार्यालय पत्रांक-बी०ई०ओ०/65/2026-27, दिनांक 16.05.2026 द्वारा अपना स्पष्टीकरण उपलब्ध कराया गया। श्री पाठक का स्पष्टीकरण स्वीकार्य योग्य नहीं पाया गया।

6- प्रकरण में श्री विश्वनाथ पाठक, खण्ड शिक्षा अधिकारी, विकास खण्ड सौरिख, जनपद कन्नौज का कृत्य कर्मचारी आचरण नियमावली-1956 के विरूद्ध पाये जाने, अनावश्यक रूप से अध्यापिका का मानसिक शोषण करने एवं उनके अनैतिक कार्यों से विभाग की छवि धूमिल होने के कारण श्री पाठक को प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के कारण उन्हें उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-4 के अन्तर्गत तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर उनके विरूद्ध नियम-7 के अन्तर्गत अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करते हुये प्रकरण की जांच हेतु मण्डलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, कानपुर मण्डल, कानपुर को पदेन जांच अधिकारी नामित किया जाता है।

7-श्री विश्वनाथ पाठक, निलम्बन अवधि में कार्यालय, मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) कानपुर मण्डल, कानपुर में सम्बद्ध रहेंगे।

8-निलम्बन अवधि में श्री विश्वनाथ पाठक को वित्तीय हस्त पुस्तिका खण्ड-2, भाग 2 से 4 के मूल नियम-53 के प्राविधानों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि अर्द्ध वेतन पर देय अवकाश की राशि के बराबर देय होगी तथा उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते धनराशि पर महंगाई भत्ता यदि ऐसे अवकाश वेतन पर देय है, भी अनुमन्य होगी, किन्तु ऐसे अधिकारी/कर्मचारी को जीवन निर्वाह भत्ते के साथ कोई महंगाई भत्ता देय न होगा, जिन्हें निलम्बन से पूर्व प्राप्त वेतन के साथ महंगाई भत्ता अथवा उपान्तिक समायोजन प्राप्त नहीं था। निलम्बन के दिनांक को प्राप्त वेतन के आधार पर अन्य प्रतिकर भत्ते भी निलम्बन की अवधि में इस शर्त पर देय होंगे, जब इनका समाधान हो जाय कि उनके द्वारा उस मद में व्यय वास्तव में किया जा रहा है, जिसके लिये उक्त प्रतिकर भत्ते अनुमन्य है।

9-उक्त प्रस्तर-8 में उल्लिखित मदों का भुगतान तभी किया जायेगा जब श्री पाठक इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें कि वे किसी अन्य सेवायोजन, व्यापारवृत्ति अथवा व्यवसाय में नहीं लगे हैं।

10-श्री विश्वनाथ पाठक के विरूद्ध आरोप पत्र पृथक से निर्गत किया जायेगा।




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