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Sunday, June 7, 2026

5 शिक्षकों पर निगरानी विभाग ने कराया FIR, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करना पड़ा महंगा

 5 शिक्षकों पर निगरानी विभाग ने कराया FIR, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करना पड़ा महंगा

बिहार के नालंदा जिले में नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. निगरानी विभाग की टीम ने पटना हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही जांच के दौरान हिलसा, राजगीर और सिलाव प्रखंडों के पांच शिक्षकों के खिलाफ अलग-अलग थानों में मुकदमा दर्ज कराया है. इन शिक्षकों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप है.



सबसे पहले शिक्षिका पर कसा गया शिकंजा: हिलसा प्रखंड के पचरुखिया उत्क्रमित मध्य विद्यालय की शिक्षिका पर सबसे पहले शिकंजा कसा गया. वर्ष 2013 में नियोजित शारदा रानी ने उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर (ओडिशा) का बीएड प्रमाणपत्र पेश किया था. निगरानी विभाग द्वारा रोल नंबर, नाम और पंजीयन संख्या की जांच कराए जाने पर विश्वविद्यालय ने प्रमाणपत्र को फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया. हिलसा थाना कांड संख्या 447/2026 में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.


अन्य चार शिक्षकों पर भी कार्रवाई: राजगीर प्रखंड के अंडवस मध्य विद्यालय के मो. जाहिद परवेज (राजगीर थाना कांड संख्या 362/2026), सिलाव प्रखंड के धामर उत्क्रमित मध्य विद्यालय के सुबोध कुमार (सिलाव थाना कांड संख्या 114/2026), पचवारा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के नीरज कुमार (सिलाव थाना कांड संख्या 115/2026) और नानंद मध्य विद्यालय के मणि शंकर शर्मा (सिलाव थाना कांड संख्या 116/2026) पर भी फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी करने का आरोप है. सभी मामलों में जांच जारी है.


जिले में अब तक 80 शिक्षकों पर केस: नालंदा जिले में अब तक कुल 80 शिक्षकों के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के मामले दर्ज हो चुके हैं. जांच में पाया गया कि इन शिक्षकों के प्रमाणपत्र संबंधित विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड से मैच नहीं कर रहे हैं. इस खुलासे से जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.


पुलिस गिरोह की तलाश में जुटी: राजगीर अनुमंडलीय डीएसपी संजित कुमार गुप्ता ने बताया कि सभी थानों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. पुलिस मुख्य रूप से फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह और बिचौलियों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हुई है. संबंधित विभाग को शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए सूचना भेज दी गई है.


"इस पूरे मामले में संबंधित थानों में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है. पुलिस मुख्य रूप से फर्जी प्रमाण पत्र बनाने, वाले गिरोह या बिचौलियों की संलिप्तता का पता लगाने में जुटी है. इसके लिए विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचना भेजकर सेवा खत्म करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल: इस घोटाले ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पटना हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही व्यापक जांच में और कई नाम सामने आने की आशंका है. जिला प्रशासन ने सभी नियोजित शिक्षकों के दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया को तेज कर दिया है.


विभाग की सख्ती जारी: निगरानी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम पूरे मामले की गहन जांच कर रही है. फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ ऐसे दस्तावेज जारी करने वालों पर भी शिकंजा कसा जाएगा. यह मामला बिहार में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है

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