बीएसए का अधिकार और रौब गांठ रहे तहसीलदार
उन्नाव,। राजस्व कार्यों में अपनी मनमाफिक कार्यशैली से सदर और फिर हसनगंज तहसील में चर्चाओं में बने रहने वाले तहसीलदार अवनीश चौधरी अब बेसिक शिक्षा विभाग में अपना रौब गांठते दिख रहे हैं। जनगणना के कार्यों में असंतोषजनक प्रगति पर शिक्षकों के वेतन रोकने का जो फरमान बीएसए को करना चाहिए था, वह यह साहब खुद बीएसए बनकर कर बैठे हैं। तहसीलदार की इस कार्रवाई का शोर पूरे शिक्षा महकमे में है। शिक्षक संगठन से लेकर शिक्षकों तक में तहसीलदार के इस आदेश से एतराज बना हुआ है। शिक्षकों का कहना है कि सीधे वेतन और मानदेय काटने का कोई अधिकार तहसीलदार को नहीं है।
छह जून को हसनगंज तहसील और चार्ज अधिकारी ग्रामीण हसनगंज अवनीश चौधरी ने 34 शिक्षक, अनुदेशक, शिक्षामित्र जो पर्यवेक्षक व प्रगणक की भूमिका में लगे हैं, उनका अलग-अलग आदेश जारी करके अग्रिम आदेशों तक वेतन रोकने का फरमान दिया था। समीक्षा के दौरान तहसीलदार को एचएलबी क्षेत्र से संबंधित जनगणना कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं मिली थी, जिसके कारण कार्य की प्रगति धीमी होने पर एतराज जताया था। साथ ही पर्यवेक्षकों और प्रगणकों की ओर से रुचि न लेने से 10 जून तक 90 फीसदी कार्य के लक्ष्य में बाधा उत्पन्न होने का दावा करते हुए खुद ही सभी का वेतन और मानदेय अवरुद्ध कर दिया।
बीएसए का बयान
“मैंने तहसीलदार की ओर से जारी पत्र को देखा है। उनकी ओर से जारी आदेश में सीधे 34 शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक का वेतन व मानदेय अवरुद्ध करने का आदेश दिया है। जबकि यह आदेश बीएसए को ही होता है। अब यह सीधे आदेश कैसे कर दिया।” — शैलेश पाण्डेय, बीएसए
जबकि कार्य की शिथिलता पर वेतन रोकने के लिए सिर्फ उनके पास संस्तुति का अधिकार है, न कि सीधे वेतन काटने का। तहसीलदार की इस कार्रवाई में पर्यवेक्षक मनोज कुमार, कनक लता मिश्रा, शगुन भारती, अरुण कुमार कन्नौजिया, हेमलता सिंह, सरिता, सन्नो साहू, प्रगणक अंजू वर्मा, नित्या त्रिपाठी, अरुण कुमार, राजरानी, श्वेता निगम, सीमा वर्मा, रंजोला देवी, बबीता देवी, नरेश कुमार, सीमा देवी, निधि द्विवेदी, गुड़िया कुमारी, गरिमा, स्मृति शुक्ला, सुनीता यादव, सैल कुमारी, आकांक्षा अवस्थी, ओमशंकर अवस्थी आदि का नाम शामिल है।

