आठवें वेतन आयोग ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को जाना
आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की टीम ने सोमवार को सुबह से शाम तक अधिकारियों-कर्मचारियों के संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर उनकी अपेक्षाएं जानीं। संगठनों ने वेतन, पेंशन, भत्तों के साथ ही अन्य सुविधाओं पर आयोग से खुलकर चर्चा की। वित्त विभाग ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पिछले दस वर्षों में बेहतर हुई प्रदेश की आर्थिक स्थिति की तस्वीर पेश की। बताया कि प्रदेश में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें सफलतापूर्वक लागू की गईं। आयोग की जो सिफारिशें होंगी, उन्हें भी पूरा करने की कोशिश रहेगी।
संगठनों ने वेतन-भत्ते, पेंशन तथा चिकित्सा व अन्य सुविधाओं के मुद्दे उठाए
होटल रेनेसां में सुबह लगभग 10 बजे आयोग ने वित्त विभाग के अधिकारियों से विभिन्न वित्तीय मुद्दों पर चर्चा की। अपर मुख्य सचिव वित्त दीपक कुमार ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदेश की आर्थिक स्थिति का ब्यौरा प्रस्तुत किया। बताया कि प्रदेश सरकार को किन स्रोतों से राजस्व मिलता है। राज्य सरकार के कुल बजट में से कितनी धनराशि वेतन, पेंशन व भत्तों में खर्च हो जाती है।
आयोग ने आईएएस एसोसिएशन, आईपीएस एसोसिएशन, आईएफएस एसोसिएशन के साथ ही अखिल भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ तथा अन्य संघों से बातचीत की। सभी संघों ने आयोग को अपनी मांगों के संबंध में पत्रक दिया।
अखिल भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के चेयरमैन पीके शर्मा के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने आयोग के समक्ष अपनी बात रखी। इसमें पेंशन को डिफर्ड-वेज मानते हुए सातवें वेतन आयोग के अनुसार पेंशन संशोधन, पेंशन राशिकरण की धनराशि की बहाली की अवधि कम किए जाने, संयुक्त संसदीय समिति द्वारा 65 वर्ष, 70 वर्ष तथा 75 वर्ष की आयु पर क्रमशः 5, 10 और 15 प्रतिशत की वृद्धि जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

