सेवानिवृत्त शिक्षकों को बड़ी राहत: पेंशन, GPF और ग्रेच्युटी के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के राजकीय एवं सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। अब सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, जीपीएफ (GPF) और ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए उन्हें जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार इन देयकों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में विशेष पहल कर रही है।
समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की तैयारी
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और क्षेत्रीय अधिकारियों से सेवानिवृत्त शिक्षकों के लंबित एवं निस्तारित मामलों का विवरण मांगा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षकों को उनके वैधानिक लाभ समय पर प्राप्त हो सकें।
अपर मुख्य सचिव ने दिए निर्देश
अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को पेंशन, जीपीएफ और ग्रेच्युटी सहित सभी देयकों का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर कराया जाए। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
शैक्षिक सत्र 2025-26 में सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के मामलों की स्थिति का विवरण निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में यह जानकारी शामिल होगी कि संबंधित शिक्षकों को पेंशन, जीपीएफ और ग्रेच्युटी का भुगतान हुआ है या नहीं तथा यदि कोई मामला लंबित है तो उसका कारण क्या है।
शिक्षकों को मिलेगा सीधा लाभ
इस पहल से सेवानिवृत्त शिक्षकों को विभागीय प्रक्रियाओं में होने वाली देरी से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही भुगतान प्रक्रिया की नियमित निगरानी से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण का रास्ता भी साफ होगा।
प्रमुख बिंदु
✅ पेंशन, GPF और ग्रेच्युटी भुगतान में तेजी लाने की तैयारी।
✅ सेवानिवृत्त शिक्षकों को DIOS कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
✅ सभी जिलों से लंबित और निस्तारित मामलों की रिपोर्ट तलब।
✅ अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जारी किए निर्देश।
✅ समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने पर विशेष जोर।
शिक्षक संगठनों ने सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे सेवानिवृत्त शिक्षकों को उनके वैधानिक लाभ समय पर प्राप्त होंगे और अनावश्यक प्रशासनिक परेशानियां कम होंगी।

