कटु सत्य है ये ~
जब समायोजन का शुरू में ही विरोध किया जा रहा था तब अपनी सुविधा के अनुसार विद्यालय जाने वाले चले गए मैंने कहा था कि आप फॉर्म न डालिये विद्यालय खाली हो जाएँगे इनका PTR तब तक सही नहीं होगा जब तक ये भर्ती नहीं लाएंगे ।
RTE के अनुसार कुछ बातें कहीं थी कि हेड को नहीं हटा सकते हैं , विद्यालय एकल नहीं होंगे और शिक्षा-मित्रों को शिक्षकों की श्रेणी में नहीं गिना जा सकता है ।
हेड जिन्होंने फॉर्म भरे नहीं माने आज पछता रहे हैं और यही हाल आगे भी होगा हेड का पद केवल शैक्षिक व्यवस्था हेतु नहीं है बल्कि प्रबंधन या प्रशासनिक कार्यों से भी होता है इसी बात को लेकर माननीय न्यायालय इंचार्ज को हेड के समान वेतन देने के लिए निर्णय दिए थे ।
हेड का पद खत्म होना आज शायद आपको समझ नहीं आ रहा है ये बिल्कुल वैसे है जैसे सत्ता बिना विधायिका के कार्यपालिका चला रही हो जो कि भविष्य में होने वाली पदोन्नति एवं भर्ती पर कुठाराघात है ।
हेड शिक्षकों के लिए एक बार पुनः आवाज उठाई है क्योंकि बेसिक के भविष्य को बर्बाद करने हेतु विभाग सब हथकंडे अपना रहा है परंतु न्यायपालिका भी इसमें कम दोषी नहीं है ।
मर्जर समायोजन ये एक छोटी-सी सीढ़ी हैं बेसिक को synchronize करने हेतु अगर भविष्य में सत्ता यही रही और यही रवैया रहा तो वो दिन दूर नहीं कि बेसिक समाप्ति की और बढ़ चले ।
वर्ष 2018 से मैं continuously ये सब बातें कहता आ रहा हूँ वो तो बीच में covid आ गया वरना आप सोचिये 2024-2026 के मध्य क्या शिक्षक चैन से बैठा है ? हर वर्ष नया कार्यक्रम शिक्षकों की परेशानी हेतु तैयार रहता है ।
गतिमान समायोजन बेशक न्यायालय के आदेशों से हो रहा है लेकिन विसंगतियां इसमें भी कम नहीं है क्योंकि इसके लिए आजतक कोई स्पष्ट guidelines तक नहीं बनाई है । बस तेजी इस कार्य में है कि विद्यालय बंद हो और शिक्षक परेशान रहे ।
#rana
