*प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 1 से 5 तक) के शिक्षकों के पदस्थापन के लिए नियम:*
यहाँ शिक्षकों की संख्या बच्चों के कुल नामांकन (Enrollment) पर निर्भर करती है:
1. 60 बच्चों तक: न्यूनतम 2 शिक्षक अनिवार्य हैं।
2. 61 से 90 बच्चे: कुल 3 शिक्षक होंगे।
3. 91 से 120 बच्चे: कुल 4 शिक्षक होंगे।
4. 121 से 150 बच्चे: कुल 5 शिक्षक होंगे।
5. 150 से अधिक बच्चे होने पर: 5 शिक्षक + 1 प्रधान शिक्षक (यानी कुल 6)। यहाँ ध्यान रखना है कि किसी भी हाल में छात्र-शिक्षक का अनुपात 30:1 (30 बच्चों पर 1 शिक्षक) से अधिक नहीं होना चाहिए।
*मध्य विद्यालय (कक्षा 6 से 8 तक) के शिक्षकों के पदस्थापन के लिए नियम:*
1. कक्षा 6 से 8 के लिए विषयवार (Subject-wise) शिक्षकों की उपलब्धता तय की गई है। हर क्लास के लिए कम से कम एक शिक्षक इस तरह होगा कि मुख्य विषयों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
2. अनिवार्य विषय शिक्षक: विज्ञान और गणित (Science & Maths) सामाजिक अध्ययन (Social Studies)
3. भाषा - सामान्यतः हिन्दी (Language - Hindi) छात्रों की संख्या बढ़ने पर अतिरिक्त शिक्षक (नोट के अनुसार)।
4. 105 से 140 छात्र होने पर: चौथा (4th) शिक्षक अंग्रेजी विषय का होगा।
5. 140 से 175 छात्र होने पर: पांचवां (5th) शिक्षक छात्रों की संख्या/मांग के अनुसार संस्कृत या उर्दू का होगा।
6. 175 से अधिक छात्र होने पर: आवश्यकता के अनुसार ऊपर दिए गए विषयों के अतिरिक्त शिक्षक रखे जाएंगे।
*प्रशासनिक और शैक्षणिक इकाई का नियम:*
1. शैक्षणिक रूप से अलग: शिक्षकों की संख्या तय करने के लिए कक्षा 1 से 5 (Primary) और कक्षा 6 से 8 (Upper Primary) को दो अलग-अलग इकाइयाँ (Separate Units) माना जाएगा। यानी दोनों का स्टाफिंग पैटर्न ऊपर दिए गए नियमों के हिसाब से अलग-अलग कैलकुलेट होगा।
2. प्रशासनिक रूप से एक: भले ही पढ़ाई और शिक्षकों के पद तय करने के लिए इन्हें अलग माना जाए, लेकिन स्कूल का प्रशासन एक ही रहेगा। पूरे विद्यालय में केवल एक ही प्रधानाध्यापक (Headmaster) होंगे, जो पूरे स्कूल (कक्षा 1 से 8) की व्यवस्था देखेंगे।
