CBSE का बड़ा बदलाव: तीसरी भाषा में लिखने-पढ़ने से ज्यादा बोलने और सुनने पर मिलेंगे अंक, नया मूल्यांकन सिस्टम लागू
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9वीं में तीसरी भाषा (R-3) के मूल्यांकन का नया प्रारूप जारी कर दिया है। नई व्यवस्था में विद्यार्थियों के लिखने-पढ़ने की तुलना में बोलने (Speaking) और सुनने (Listening) के कौशल पर अधिक जोर दिया जाएगा।
बोलने और सुनने को मिलेगा सबसे अधिक वेटेज
CBSE ने तीसरी भाषा के लिए 100 अंकों का स्कूल आधारित मूल्यांकन तय किया है। इसमें सबसे अधिक 40 अंक Listening और Speaking Skills के लिए निर्धारित किए गए हैं।
इस मूल्यांकन में विद्यार्थियों की क्षमता का आकलन इन गतिविधियों के माध्यम से किया जाएगा—
सुनकर प्रश्नों के उत्तर देना
चित्र या घटना का वर्णन करना
समूह चर्चा में भाग लेना
अपना एवं परिवार का परिचय देना
रोल प्ले और संवाद
वाद-विवाद
दैनिक जीवन से जुड़े संवाद
Reading, Writing और Project के भी तय हुए अंक
नई मूल्यांकन प्रणाली में अंक इस प्रकार निर्धारित किए गए हैं—
Listening & Speaking: 40 अंक
Reading Skills: 20 अंक
Creative Writing: 15 अंक
Textbook Based Writing: 10 अंक
Project Work: 15 अंक
पूरे वर्ष होगा मूल्यांकन
CBSE ने स्पष्ट किया है कि Listening और Speaking का मूल्यांकन एक दिन की परीक्षा के बजाय पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान विभिन्न कक्षा गतिविधियों के माध्यम से किया जाएगा। शिक्षकों को निर्धारित गतिविधियों में से मूल्यांकन करना होगा।
NCERT वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई अध्ययन सामग्री
तीसरी भाषा के लिए आवश्यक अध्ययन सामग्री NCERT की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भाषा को पहले समझने, सुनने और बोलने का आत्मविश्वास विकसित करना है, ताकि वे स्वाभाविक रूप से भाषा का प्रयोग कर सकें।
Project Work भी होगा अनिवार्य
CBSE ने 15 अंकों का Project Work भी अनिवार्य किया है। इसके लिए स्थानीय रीति-रिवाज, त्योहार, लोक कला, स्थानीय साहित्यकार, तकनीकी नवाचार और क्षेत्रीय संस्कृति जैसे विषय सुझाए गए हैं।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रोजेक्ट का मूल्यांकन केवल उसकी सजावट के आधार पर नहीं होगा, बल्कि मौलिकता, शोध, विषय की समझ और प्रस्तुति की गुणवत्ता के आधार पर किया जाएगा। इसके साथ 5 अंकों का मौखिक परीक्षण (Viva) भी आयोजित किया जाएगा।
क्या है इस बदलाव का उद्देश्य?
CBSE का मानना है कि नई व्यवस्था से विद्यार्थियों में भाषा को व्यावहारिक रूप से समझने, बोलने और संचार कौशल विकसित करने पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की बहुभाषी शिक्षा और कौशल आधारित मूल्यांकन की अवधारणा के अनुरूप है।

