सेवानिवृत्त प्राचार्य सत्रलाभ लेकर बन गए शिक्षक
प्रयागराज, उच्च शिक्षा विभाग में जमकर मनमानी चल रही है। राजकीय महाविद्यालय हरीपुर निहस्था, रायबरेली के प्राचार्य रहे डॉ. चन्द्र प्रकाश के 26 जुलाई को सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें शिक्षक के रूप में सत्रलाभ दे दिया गया। तकरीबन 11 महीने के सत्रलाभ से उन्हें 35 लाख रुपये से अधिक का वेतन भुगतान होगा।
मजे की बात है कि इस महाविद्यालय में प्राचीन इतिहास विषय की अनुमन्यता नहीं है और यहां इतिहास विषय की पढ़ाई होती है। नियमानुसार प्राचीन इतिहास विषय का शिक्षक इतिहास नहीं पढ़ा सकता। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को असिस्टेंट प्रोफेसर की नई भर्ती के लिए जो 2107 पदों का अधियाचन भेजा गया है उसमें भी इतिहास के 60 और प्राचीन इतिहास के 25 पद अलग-अलग भेजे गए हैं। इसे संयोग कहें या कुछ और कि डॉ. चन्द्र प्रकाश मई तक क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी विन्ध्याचल मंडल के पद पर कार्यरत थे। यदि उसी पद पर रहते तो जन्मतिथि जुलाई में ही सेवानिवृत्ति हो जाती। मई में ही उनका तबादला रायबरेली हुआ था। उच्च शिक्षा निदेशक मोनिका सिंह की ओर से 30 जुलाई को डॉ. चन्द्र प्रकाश को सत्रलाभ स्वीकृत करने संबंधी आदेश जारी किया गया है। उनके आदेश के बाद डॉ. चन्द्र प्रकाश ने प्राचार्य का प्रभार महाविद्यालय के वरिष्ठतम प्राध्यापक डॉ. दिनेश को सौंप दिया है। इस मामले में डॉ. चन्द्र प्रकाश का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत प्राचीन इतिहास के शिक्षक इतिहास पढ़ा सकते हैं।

