स्कूलों में कामकाज बाधित, बीआरसी में प्रतिनियुक्त शिक्षक नदारद
मधुबनी। जिले में शिक्षकों के डेपुटेशन (प्रतिनियोजन) का मामला एक बार फिर सवालों के घेरे में है। रहिका प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा डीएलएड परीक्षा व्यवस्था से अलग 27 शिक्षकों को 15 दिनों के लिए बीआरसी (ब्लॉक रिसोर्स सेंटर) में प्रतिनियुक्त किया गया। हालांकि, गुरुवार को की गई पड़ताल में प्रतिनियुक्त शिक्षकों में से एक भी शिक्षक बीआरसी कार्यालय में मौजूद नहीं मिला।
कार्यालय में केवल कंप्यूटर ऑपरेटर अंजनी कुमार और पहले से प्रतिनियुक्त टेकनाथ प्लस-टू उच्च विद्यालय की कंप्यूटर विज्ञान शिक्षिका कुमारी रेशु ही कार्य करती मिलीं। जानकारी के अनुसार, बाकी सभी शिक्षक केवल योगदान दर्ज कर अपने-अपने घर लौट गए।
बैठने की व्यवस्था तक नहीं, फिर 27 शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति क्यों?
बीआरसी कार्यालय में पांच शिक्षकों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में 27 शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के आदेश के अनुसार वाटसन प्लस-टू उच्च विद्यालय, शिवगंगा बालिका प्लस-टू उच्च विद्यालय और जीएमएसएस प्लस-टू विद्यालय के शिक्षकों को बीआरसी में प्रतिनियुक्त किया गया है।
स्कूलों का काम प्रभावित
इन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति ऐसे समय की गई है, जब विद्यालयों में नामांकन, रजिस्ट्रेशन स्लिप का शुद्धिकरण, विभिन्न प्रमाणपत्रों का वितरण, अभिलेख संधारण सहित कई प्रशासनिक कार्य चल रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों की अनुपस्थिति से शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
बताया गया कि इस प्रतिनियोजन से पहले संबंधित प्रधानाध्यापकों (एचएम) से कोई विमर्श या सहमति नहीं ली गई। बिना समुचित योजना के शिक्षकों को विद्यालयों से हटाकर बीआरसी भेज दिया गया।
कार्य की जिम्मेदारी भी तय नहीं
पड़ताल में यह भी सामने आया कि प्रतिनियुक्त शिक्षकों से बीआरसी में कौन-सा कार्य कराया जाएगा, इसकी कोई स्पष्ट कार्ययोजना या जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। इससे पूरे डेपुटेशन की आवश्यकता और औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
शिक्षक संगठनों और शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि जिले में लंबे समय से बिना स्पष्ट कार्य के शिक्षकों को बीआरसी में प्रतिनियुक्त करने की परंपरा बन गई है। इससे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बढ़ती है, जबकि सरकारी खजाने से वेतन का भुगतान लगातार होता रहता है।
मिथिला मूवमेंट अगेंस्ट करप्शन के संदीप पासवान ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि बिना कार्य के शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति का औचित्य स्पष्ट किया जाए तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) अक्षय कुमार पांडेय ने कहा कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

