🌱 इको क्लब वार्षिक कैलेंडर 2026-27
विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता के लिए मासिक गतिविधियां
🌍 अप्रैल – विश्व पृथ्वी दिवस
22 अप्रैल – विश्व पृथ्वी दिवस:
इको क्लब का शपथ ग्रहण, पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता एवं
Mission LiFE की शुरुआत।
💧 मई – जल संरक्षण अभियान
जल संरक्षण:
“चर्चा जल संरक्षण” पर कार्यशाला तथा गर्मियों में पानी के प्रति
जागरूकता अभियान।
🌿 जून – विश्व पर्यावरण दिवस
5 जून – विश्व पर्यावरण दिवस:
ऑनलाइन पर्यावरण प्रतियोगिताएं एवं घर पर पौधारोपण अभियान।
🌳 जुलाई – वन महोत्सव
विद्यालय परिसर में सघन पौधारोपण एवं
“वृक्ष मित्र अभियान” की शुरुआत।
⚡ अगस्त – ऊर्जा संरक्षण
बिजली बचाने के लिए जागरूकता रैली एवं
18 अगस्त को पोस्टर प्रतियोगिता।
🧹 सितंबर – स्वच्छता पखवाड़ा
1 से 15 सितंबर:
विद्यालय एवं आसपास के क्षेत्र की सफाई तथा
प्लास्टिक मुक्त अभियान।
🍂 अक्टूबर – वन्यजीव सप्ताह
वन्यजीव संरक्षण पर फिल्म स्क्रीनिंग,
जागरूकता कार्यक्रम तथा निबंध एवं चित्रांकन प्रतियोगिता।
📄 नवंबर – प्रदूषण नियंत्रण
“पटाखा मुक्त दिवाली” अभियान एवं
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर विद्यार्थियों के साथ चर्चा।
♻️ दिसंबर – बेस्ट मैनेजमेंट
“कचरे से जुगाड़” (Best Out of Waste)
प्रदर्शनी एवं कंपोस्ट पिट का रखरखाव।
🌱 जनवरी – किचन गार्डन
विद्यालय की वाटिका में मौसमी सब्जियां एवं
औषधीय पौधों की देखभाल।
🔬 फरवरी – राष्ट्रीय विज्ञान दिवस
28 फरवरी – राष्ट्रीय विज्ञान दिवस:
पर्यावरण अनुकूल मॉडल एवं विद्यार्थियों के नवाचारों की प्रदर्शनी।
💧 मार्च – विश्व जल दिवस
22 मार्च – विश्व जल दिवस:
वर्षभर की गतिविधियों की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट तैयार करना एवं
“इको-कैम्पस” का सम्मान।
🌍 पूरे वर्ष Mission LiFE पर विशेष जोर
इको क्लब की गतिविधियों के साथ पूरे वर्ष Mission LiFE के लक्ष्यों को लागू किया जाएगा। छात्रों को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- ☀️ सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना
- 🌿 ई-वेस्ट को कम करना और सही तरीके से निस्तारण करना
- 💧 जल की बचत करना
- ⚡ बिजली एवं ऊर्जा की बचत करना
- 🌳 अधिक से अधिक पौधारोपण करना
- 🚫 सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल छोड़ना
🎯 इको क्लब का उद्देश्य
विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करना और विद्यालय को एक हरित, स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल परिसर के रूप में विकसित करना।
नोट:
विद्यालय अपनी स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों एवं
विभागीय निर्देशों के अनुसार गतिविधियों में आवश्यक परिवर्तन कर सकता है।
