पटना: बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षक दिवस के मौके पर राज्य के करीब 5 लाख 80 हजार शिक्षकों के नाम विशेष पत्र जारी किया. तीन पन्नों के इस पत्र में उन्होंने शिक्षकों को केवल पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण से लेकर समाज और राष्ट्र के निर्माण तक की महत्वपूर्ण कड़ी बताया है.
शिक्षा मंत्री की चिट्ठी
मंत्री ने अपने संदेश में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा है कि शिक्षक ज्ञान देने के साथ जीवन को दिशा देने, संस्कारों को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी का निर्माण करने का काम करते हैं. शिक्षा मंत्री के पत्र की शुरुआत भारतीय परंपरा में गुरु के महत्व और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति को नमन करने से होती है.
शिक्षक की भूमिका कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं
शिक्षा मंत्री ने शिक्षक दिवस को केवल एक औपचारिक उत्सव के बजाय शिक्षकों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और आत्ममंथन का अवसर बताया है. उन्होंने संदेश दिया है कि शिक्षक की भूमिका कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं है. विद्यार्थी अपने शिक्षक के व्यवहार, विचार, अनुशासन और संवेदनशीलता से भी सीखते हैं. इसलिए शिक्षक का व्यक्तित्व स्वयं विद्यार्थियों के लिए एक तरह का पाठ होता है.
प्राचीन शिक्षा व्यवस्था का किया उल्लेख
मिथिलेश तिवारी ने पत्र में बिहार की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा को भी प्रमुखता दी है. उन्होंने नालंदा जैसी प्राचीन शिक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार की पहचान केवल एक राज्य के रूप में नहीं, बल्कि भारत की महान ज्ञान परंपरा की भूमि के तौर पर रही है. कभी देश-विदेश से विद्यार्थी यहां ज्ञान हासिल करने आते थे. अब जरूरत इस बात की है कि उसी विरासत को वर्तमान समय की जरूरतों के साथ जोड़कर बिहार को फिर से ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाई जाए
आधुनिकता के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा
शिक्षा मंत्री ने आधुनिक शिक्षा की दिशा भी अपने पत्र में स्पष्ट की है. उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को केवल अच्छे अंक या विषय की जानकारी तक सीमित नहीं माना है. उनके मुताबिक आज की शिक्षा में ज्ञान के साथ संस्कार, विज्ञान के साथ विवेक, तकनीक के साथ मानवीय संवेदना और आधुनिकता के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का संतुलन जरूरी है. यानी विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और बदलती दुनिया के लिए तैयार करने के साथ उन्हें अपनी संस्कृति, मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी जोड़े रखना होगा.
आचरण और जिम्मेदारी के प्रति रहें सजग
पत्र में शिक्षकों को विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है. मंत्री ने कहा है कि शिक्षक की वास्तविक सफलता तब है, जब वह किसी बच्चे की क्षमता को पहचानकर उसे सही दिशा दे, उसके भीतर आत्मविश्वास पैदा करे और उसके सपनों को आगे बढ़ने का अवसर दे. बच्चों के जीवन पर शिक्षक के शब्द और व्यवहार का लंबे समय तक असर रहता है. इसलिए शिक्षक को अपने आचरण और जिम्मेदारी के प्रति भी सजग रहना होगा.
‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य से जोड़ा
मिथिलेश तिवारी ने पत्र में ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य से शिक्षा को जोड़ते हुए कहा है कि आने वाले भारत की बुनियाद आज के विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल, नवाचार और मानवीय मूल्यों पर तैयार होगी. इसके लिए शिक्षा व्यवस्था में ज्ञान के साथ शोध, कौशल और नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है. पत्र में विद्यालयों में विज्ञान, गणित और तकनीक के प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के साथ कौशल और व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है.
"बिहार के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा पहुंचना जरूरी है. इसके साथ बच्चों को भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता बताई गई है. शिक्षकों से नए संकल्प के साथ शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपील है."-मिथिलेश तिवारी, शिक्षा मंत्री
