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Monday, September 14, 2026

हिंदी जानते हुए भी बोलने-पढ़ने में हिचक रहे लोग, अंग्रेजी के बढ़ते दबदबे पर शिक्षक संघ अध्यक्ष अनिल ने जताई चिंता

 हिंदी दिवस पर बच्चों ने दिखाई प्रतिभा, प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मेडल देकर किया सम्मानित



देवरिया। सदर ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय असना में हिंदी दिवस उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों की प्रतिभा और हिंदी भाषा के प्रति उनका विशेष लगाव देखने को मिला। विद्यालय में भाषण, श्रुतलेख, निबंध और वाचन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।


प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के आधार पर मेडल देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।


अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव पर जताई चिंता

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने बच्चों को संबोधित करते हुए हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी देश के विभिन्न राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों को आपस में जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। हिंदी संपर्क भाषा के रूप में देश की एकता और अखंडता को मजबूत करती है।


उन्होंने कहा कि तकनीकी और आर्थिक विकास के साथ अंग्रेजी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। हिंदी देश की राजभाषा होने के बावजूद आज कई क्षेत्रों में अंग्रेजी का दबदबा देखने को मिलता है। कई बार हिंदी जानने वाले लोग भी हिंदी में बोलने, पढ़ने और काम करने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं, जो चिंता का विषय है।


हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सभी को मिलकर करना होगा प्रयास

अनिल यादव ने कहा कि हिंदी के प्रचलन और सम्मान को बढ़ाने की जिम्मेदारी केवल किसी एक संस्था या वर्ग की नहीं है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ शिक्षक समुदाय और समाज के सभी लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा।


उन्होंने कहा कि बच्चों में हिंदी के प्रति सम्मान, आत्मविश्वास और गर्व की भावना विकसित करने के लिए विद्यालय स्तर से ही सकारात्मक वातावरण तैयार करना आवश्यक है। हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि देश की विविध संस्कृतियों को जोड़ने वाली एक मजबूत कड़ी भी है। इसलिए नई पीढ़ी को हिंदी के इतिहास और महत्व से परिचित कराना समय की जरूरत है।


14 सितंबर 1949 को हिंदी को मिला था राजभाषा का दर्जा

विद्यालय के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र नाथ चौबे ने हिंदी दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में अपनाया था। इसी ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।


उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की बड़ी आबादी हिंदी को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलती है। इसके साथ ही हिंदी देश के करोड़ों लोगों के बीच संपर्क भाषा के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


आजादी की लड़ाई में हिंदी बनी जनसंवाद का सशक्त माध्यम

प्रधानाध्यापक ने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदी ने आम लोगों तक संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश के नेताओं ने जनमानस से जुड़ने और स्वतंत्रता आंदोलन के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हिंदी का व्यापक रूप से उपयोग किया।


उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे दैनिक जीवन में हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करें और अपनी भाषा के प्रति सम्मान एवं गर्व की भावना बनाए रखें। उन्होंने कहा कि कोई भी भाषा तभी मजबूत होती है, जब नई पीढ़ी उसे बोलने, पढ़ने और लिखने में गर्व महसूस करे।


प्रतियोगिताओं में बच्चों ने दिखाया शानदार प्रदर्शन

हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित भाषण, श्रुतलेख, निबंध और वाचन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने अपनी भाषा ज्ञान, अभिव्यक्ति क्षमता और रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।


प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मेडल देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों और शिक्षकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।


इस अवसर पर अवनीश कुमार, राम प्रताप यादव सहित गांव के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को हिंदी के इतिहास, महत्व और वर्तमान समय में हिंदी के सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में भी जानकारी दी गई।

हिंदी जानते हुए भी बोलने-पढ़ने में हिचक रहे लोग, अंग्रेजी के बढ़ते दबदबे पर शिक्षक संघ अध्यक्ष अनिल ने जताई चिंता Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Primary ka school

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