अनुकंपा नियुक्ति के लिए वस्तुनिष्ठ परीक्षा और पाँच प्रतिशत कोटा वैध: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में मृतक कर्मचारियों के आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में पाँच प्रतिशत कोटा और लिखित (वस्तुनिष्ठ) परीक्षा की शर्त को पूरी तरह वैध करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब उपलब्ध पदों की तुलना में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या अधिक हो, तो उनके बीच चयन के लिए वस्तुनिष्ठ परीक्षा कराना अनुचित नहीं है। इसी
टिप्पणी के साथ अदालत ने नियमावली को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
खंडपीठ का महत्वपूर्ण निर्णय
यह फैसला न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने गाजीपुर के अजय सिंह यादव व 25 अन्य की कुल नौ याचिकाओं पर सुनाया। ये सभी याचिकाएं सेवाकाल के दौरान मृत पुलिसकर्मियों के आश्रितों द्वारा दाखिल की गई थीं।
याचियों की ओर से तर्क दिया गया था कि उत्तर प्रदेश उप-निरीक्षक एवं निरीक्षक (सिविल पुलिस) सेवा नियमावली, 2015 के नियम 5(1) के तहत जोड़ी गई वह टिप्पणी संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 309 के विरुद्ध है, जिसके अनुसार सीधी भर्ती के कुल पदों के अधिकतम पाँच प्रतिशत पद ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आरक्षित हो सकते हैं। साथ ही, आवेदकों की संख्या अधिक होने पर वस्तुनिष्ठ परीक्षा कराने और एक ही अवसर मिलने के प्रावधान को भी चुनौती दी गई थी।
हालांकि, कोर्ट ने प्रावधानों को सही ठहराते हुए कहा कि यह प्रतिबंध न तो मनमाना है और न ही भेदभावपूर्ण, बल्कि पूरी तरह उचित और तर्कसंगत है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भारी संख्या में पद केवल अनुकंपा के आधार पर भर दिए जाएं, तो खुली प्रतियोगिता से आवेदन करने वाले आम युवाओं के अवसर प्रभावित होंगे।
