इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश (Ritu Chauhan v. State of U.P., Writ-A No. 53945/2017)
⚖️ कोर्ट का आदेश
याचिकाकर्ता ने UPTET-2017 में OMR शीट पर “प्रयास की गई भाषा” के कॉलम में अंग्रेजी/उर्दू/संस्कृत में से कोई विकल्प नहीं भरा था। इसी कारण उसकी OMR शीट का कंप्यूटर द्वारा मूल्यांकन नहीं किया गया। उसने इसे मानवीय भूल बताते हुए बाद में कॉलम भरने और OMR का मूल्यांकन कराने की मांग की।
कोर्ट ने माना कि परीक्षा प्राधिकरण ने अभ्यर्थियों को OMR शीट सही ढंग से भरने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की परीक्षा होने के कारण प्रत्येक OMR को बाद में मैन्युअली जांचकर खाली कॉलम भरना व्यावहारिक नहीं है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में OMR का संबंधित कॉलम पूरी तरह खाली छोड़ना केवल साधारण मानवीय भूल नहीं, बल्कि निर्देशों का पालन न करने और अभ्यर्थी की सतर्कता में कमी माना जाएगा। इसलिए परीक्षा प्राधिकरण को बाद में उस कॉलम को भरने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
📌 अंतिम आदेश
माननीय न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने 24 नवंबर 2017 को रिट याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कोई लागत नहीं लगाई।
महत्वपूर्ण बात: इस निर्णय में कोर्ट ने OMR की “प्रयास की गई भाषा” का कॉलम खाली छोड़ने को ऐसी त्रुटि माना जिसे बाद में परीक्षा प्राधिकरण द्वारा सुधारने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह निर्णय विशेष रूप से इसी तथ्य और उस समय लागू परीक्षा प्रक्रिया के संदर्भ में है।

