Teacher's Day: ब्लैकबोर्ड से LED स्क्रीन तक… बेगूसराय के इन 5 शिक्षकों ने अपने दम पर बदल दी सरकारी स्कूलों की तस्वीर
अपनी सैलरी का हिस्सा लगाया, दूसरे शिक्षकों को भी जोड़ा और सरकारी स्कूल को बेहतर बनाने की मुहिम शुरू की. प्राचार्य संजय कुमार की पहल से मध्य विद्यालय चेरिया बरियारपुर में LED क्लासरूम, बेहतर शैक्षणिक माहौल और हरियाली समेत कई सुविधाएं विकसित हुईं. आज यह स्कूल बेगूसराय के बेहतर सरकारी स्कूलों की लिस्ट में है.
आदर्श मध्य विद्यालय मोहनपुर को सच में ‘आदर्श’ बनाने की शुरुआत शिक्षक विनय कुमार ने की. उनकी पहल और मेहनत पर ग्रामीणों ने भी भरोसा जताया और स्कूल के विकास के लिए 30 लाख रुपये से ज्यादा का सहयोग दिया. आज पढ़ाई से लेकर स्कूल की व्यवस्थाओं तक, यह सरकारी स्कूल बिहार के बड़े प्राइवेट स्कूलों को भी टक्कर देता नजर आता है
राजकीय कृत मध्य विद्यालय बीहट के प्राचार्य रंजन कुमार ने स्कूल में मौजूद संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए व्यवस्थाओं को लगातार अपग्रेड किया. बच्चों की पढ़ाई और शानदार परिणामों के लिए उन्हें शिक्षा विभाग की ओर से कई अवार्ड भी मिल चुके हैं. बेहतर व्यवस्था और शैक्षणिक माहौल की वजह से यह स्कूल जिले के चुनिंदा बेहतरीन सरकारी स्कूलों में अपनी जगह बना चुका है.
एक वक्त था जब उत्क्रमित मध्य विद्यालय फजिलपुर में न पढ़ाई का माहौल था और न ही पर्याप्त व्यवस्था. प्राचार्य रंजन कुमार झा ने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के संघर्ष को ही अपनी मुहिम बना लिया. लगातार प्रयासों से स्कूल की तस्वीर बदली, कई अवार्ड भी अपने नाम किए और आज यह स्कूल जिले के टॉप-5 सरकारी स्कूलों में शुमार माना जाता है.
स्कूल तक पहुंचने के लिए आज तक पक्की सड़क नहीं बन पाई, लेकिन प्राचार्य मोहन कुमार ने बच्चों के सपनों की राह में कोई कमी नहीं आने दी . उन्होंने अपनी जमीन देकर स्कूल के निर्माण करवाया.अपने वेतन से कॉपी समेत पढ़ाई का सामान खरीदकर बच्चों को देते हैं और शिक्षकों को उनकी जिम्मेदारी समझाते हुए हर दिन बेहतर शिक्षा के लिए प्रयास करते हैं.

