Sunday, April 26, 2020

सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रधानमंत्री जी को लिखा गया पत्र

विषयः कर्मचारियों/पेंशनरों के डी0ए0/डी0आर0 को डेढ़ वर्ष के लिए फ्रीज पर पुर्नविचार करने
के सम्बन्ध में।
महोदय,
सादर अवगत कराना है कि भारत सरकार के वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग के शासनादेश
संख्या-1/1/2020-ई-2 (बी), दिनांक 23-04-2020 द्वारा कर्मचारियों/शिक्षकों/पेंशनरों को
मिलने वाले डी0ए0/डी0आर0 की दिनांक 01-01-2020 से दि0 30-06-2021 तक मिलने वाली
3 किश्तों को फ्रीज कर दिया गया है।
इस सम्बन्ध में अनुरोध करना है कि आज डाक्टर सहित सभी चिकित्साकर्मी, सफाईकर्मी,
पुलिस, निकाय कर्मी आदि शासकीय कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर बिना अपने परिवार
की चिन्ता किये हये कोरोना महामारी से आपके निर्देशानुसार पूर्ण मनोयोग से नागरिकों के रक्षार्थ
रात दिन लगे हये हैं। साथ ही साथ ये लोग एक दिन का वेतन/पेंशन भी दे रहे हैं। कुछ लोग
इससे भी अधिक आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। वित्त मंत्रालय का यह शासनादेश
कर्मचारियों/पेंशनरों को दुख देने वाला है। उक्त लोग महगाई की मार किसी भी दशा में सहन
कर नहीं पायेंगे। इसलिए इस पर पुर्नविचर करने की आवश्यकता है। इस सम्बन्ध में अधोहस्ताक्षरी
निग्न बिन्दुओं पर आपका ध्यान आकृषित करना चाहता है :-
(1) रु0-18000/- मूल वेतन वाला कर्मचारी सबसे निचले सोपान का है। यदि यह मान लें
कि रोकी गयी 03 किश्ते क्रमशः 4,4,5 प्रतिशत होंगी तो वर्णित अवधि में इन
सफाई/चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का 27,000/- 50 फीज किया गया है। इसी तरह
न्यूनतम पेंशन 9,000/-रु0 वाले पेंशनर/पारिवारिक पेंशनर को रु0-13,500/- की चोट
पहुंचाई गयी है। यकीन मानिए आदरणीय महोदय, इससे यह वर्ग कराह उठेगा।
प्रतिमाह दो-ढाई लाख रुपये वेतन और एक लाख पेंशन पाने वाले लोगों एवं उक्त निचले
सोपान के लोगों को एक तराजू पर तौला जाना किसी भी दशा में औचित्यपूर्ण नहीं हैं।
निचले सोपान के तृतीय/चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों एवं इन पदों से सेवानिवृत्त पेंशनरों की
परिस्थितियां पूरी तरह भिन्न हैं।
यह भी विचारणीय है कि इसमें दिनांक 01-01-2020 से 30-06-2021 के मध्य
सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को भी नहीं बख्शा गया है। इस व्यवस्था से उनके
सेवनवृत्तिक लाभों में लाखों रुपये की कटौती कर ली गयी है, क्योंकि वेतन/पेंशन के
पुनरीक्षण में यह 03 डी०ए०/डी0आर0 की किश्तें सेवानिवृत्त होने वाले व्यक्ति के जीवन
के अंतिम दिन तक सालती रहेंगी, क्योंकि यह निरन्तर चलने वाली हानि है। मेरे विचार से
इन बुजुर्गों की आह लेना उचित नहीं होगा।

मान्यवर, हम जानते हैं कि आज देश कठिन दौर से गुजर रहा है। देश का हर नागरिक
आपके साथ है। किन्तु हमारे ऊपर इतना वजन न डाल दिया जाये कि कर्मचारी/शिक्षक/पेंशनर
का जीवन दूभर हो जाये। हमारी आर्थिक क्षमता पर भी विचार किया जाना चाहिये। वैसे संसाधन
बढ़ाने और नये संशाधन खोजने के और भी मार्ग हैं, जिनपर विचार किया जाना, समय की
आवश्यकता है। मेरे विचार से निम्नलिखित बिन्दु ऐसे हैं, जिन पर विचार किया जा सकता है:-
(1) देश और प्रदेशों में राष्ट्रीय पेंशन व्यवस्था (एनपीएस), जो वास्तव में पेंशन नहीं बल्कि
स्वनिवेशित धन वापसी योजना है, को दिनांक 01-01-2004 से देश में लागू की गयी है।
देश एवं विभिन्न प्रदेशों के कर्मचारियों द्वारा प्रारम्भ से ही इसका प्रबल विरोध किया जा
रहा है। अगर एक बार विरोध की बात को हम नजरन्दाज करते हुये केवल सरकार की
आर्थिक हानि की बात करें तो यह कहा जा सकता है कि इस व्यवस्था (एन०पी०एस०) में
वेतन और डी0ए0 का 10 प्रतिशत कर्मचारी से काटा जाता है और पहले 10 प्रतिशत तथा
अब 14 प्रतिशत, सरकार द्वारा जमा किया जा रहा है। प्रदेशों की स्थिति यह है कि जिन
तिथियों से इसे लागू किया गया है, अधिकांश मामलों में उसके 10 वर्ष बाद टीयर-1 का
खाता खुलवाकर कटौती प्रारम्भ की जा सकी है। परिणाम स्वरुप अरबों रुपया एरियर के
रुप में भी सरकार को धनराशि जमा करनी पड़ रही है। इसके सापेक्ष वर्तमान में सरकार
को इस व्यवस्था से कोई लाभ भी नहीं हो रहा है। उलटे पुराने कर्मी को पेंशन एवं नये
कर्मों के लिए अभिदान जमा करने का भार सरकार के ऊपर अवश्य बढ़ा हुआ है।
ऐसी दशा में अगर एन०पी०एस० को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू कर दी जाये
तो जो धनराशि टीयर-1 खाते में जमा है, वह सरकार के पास आ सकती है, जिसमें
सरकार का हिस्सा ज्यादा है। इसलिए बहुत बड़ा हिस्सा टियर-1 का सरकार का हो
जायेगा। कर्मचारी के हिस्से को उनका जीपीएफ खाता खुलवाकर जमा करा दिया जाये
और उसकी निकासी पर सरकार अपनी सुविधानुसार रोक लगा सकती है। उस धन का
भी उपयोग सरकार कर सकती है। इस संकट की घड़ी में अरबों रुपये की यह धनराशि
सरकार को बहुत बड़ी राहत पहुंचायेगी। ऐसा कर देने पर सरकार पर तत्काल कोई
आर्थिक प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। साथ ही साथ आगे आने वाली आर्थिक समस्याओं को
हल करने में काफी सीमा तक यह व्यवस्था सहायक होगी।
देश में तमाम राष्ट्रीय/बहुराष्ट्रीय कम्पनियां चल रही हैं। निजी अस्पताल जनता से मोटी
रकम वसूल रहे हैं। सरकार के अनुरोध पर भी बहुत कम लोग आगे आये हैं, जिन्होनें खुले
मन से सहायता प्रदान की है। बहुराष्ट्रीय बड़ी बड़ी कम्पनियां हाथ सिकोड़े हुये हैं, जबकि
उनकी सारी कमाई जनता से ही की गयी है। उनसे भी सरकार द्वारा किसी न किसी रुप
में लेवी लगाई जा सकती है।
हर धर्म के धार्मिक संस्थानों/स्थलों पर बहुत बड़ी धनराशि बिना उपयोग के पड़ी हुई है।
यह धनराशि शत प्रतिशत धनराशि जनता द्वारा दान के रुप में दी गयी है। आज जनता
कष्ट में है। इस कष्ट में कमी लाने के उददेश्य से इन धार्मिक संस्थाओं में जमा धनराशि
की कग से कम आधी धनराशि देश के काम में लाई जा सकती है। यदि किसी संस्था ने
पूर्व में कोई दान आदि दे रखा तो उसका समायोजन किया जा सकता है, लेकिन आधी
धनराशि इन संस्थाओं से लेना पूरी तरह न्यायसंगत होगा।
आदरणीय महोदय, आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। हम सबके लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं।
बड़े से बड़े निर्णय लेने में सक्षम एवं निपुण हैं। इस संकट की घडी में निश्चय ही अधिक बेहतर
सोच सकते हैं।
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अतः अनुरोध है कि :-
1- देश/प्रदेश के कर्मचारियों/शिक्षकों/पेंशनरों को मिलने वाले डी0ए0/डी0आर0 की 3
किश्तों को सीज करने का उक्त निर्णय दि0 23-04-2020 को निरस्त कराने का कष्ट करें।
2- पीडादायक एन०पी०एस० को समाप्त कर उसकी धनरशि का उपरोक्तानुसार सदुपयोग
कराने पर विचार करने का भी कष्ट करें। इस निमित्त हमारे संगठन द्वारा दिनांक 27-11-2019
को जन्तर-मन्तर नई दिल्ली पर धरना देकर 25 हजार पेंशनरों की हस्ताक्षरयुक्त याचिका व
लगभग 1000 पेंशनरों/बुजुर्गों की सभा में पारित ज्ञापन उक्त तिथि को आपके कार्यालय में प्राप्त
कराये जा चुके हैं।
आदर सहित।
भवदीय
(अमर नाथ यादव)
अध्यक्ष।
प्रतिलिपिः माननीय मुख्यमंत्री जी, उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ को शासनादेश संख्या-2/
2020/वे0आ0-1-314/दस-2020-8एम/2016, दि0 24-04-2020 के संदर्भ में सूचनार्थ एवं
तद्नुसार विचारार्थ प्रेषित।
(अमर नाथ यादव)
अध्यक्ष

सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रधानमंत्री जी को लिखा गया पत्र Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Updatemarts

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