उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस समेत अन्य भर्तियों में केवल प्रदेश की महिलाओं को 20 फीसदी क्षैतिज आरक्षण दिए जाने समेत 11 सूत्रीय मांग को लेकर प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने सोमवार को मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। प्रतियोगी छात्रों ने चेताया कि अगर सरकार जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नही लेती है तो प्रतियोगी छात्र पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान चला कर सरकार और आयोग द्वारा छात्रों के साथ किए जा रहे अमानवीय कृत्य से अवगत कराएंगे।
संघर्ष समिति की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में मांग की है कि पीसीएस मुख्य परीक्षा में आवेदकों की कुल संख्या के दस फीसदी अभ्यर्थियों को सफल किया जाए। इसके साथ ही यह भी मांग की कि पीसीएस मुख्य परीक्षा में विश्वविद्यालय की ओर से प्रदान किए गए उपाधि के विषयों को शामिल किया जाए। लगातार आयोग की ओर से पीसीएस में किए जा रहे परिवर्तन के चलते प्रतियोगियों को दो अतिरिक्त अवसर प्रदान किया जाए। प्रादेशिक न्यायिक सिविल सेवा में मात्र चार अवसर की बाध्यता समाप्त किया जाए।
आयोग की सीधी भर्तियों में स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक को जोड़कर अंतिम सूची जारी की जाए। इंटरव्यू के दौरान आयोग में जैमर लगे। अभ्यर्थियों को स्कैन कांपिया ऑनलाइन देखने की व्यवस्था हो,आयोग के सभी परिणाम का प्रतीक्षा सूची जारी किया जाए, आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच के लिए स्पेशल टॉस्क फोर्स का गठन हो। इसके साथ ही यह भी मांग की है कि 2013 से आयोग के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले प्रतियोगी छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस हो।
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