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Saturday, February 7, 2026

एक महिला टीचर के चक्‍कर कैसे लाखों शिक्षकों पर लटकी तलवार, 15 साल बाद खुला राज

एक महिला टीचर के चक्‍कर कैसे लाखों शिक्षकों पर लटकी तलवार, 15 साल बाद खुला राज



उत्‍तर प्रदेश में एक ऐसा मामला आाय जिसने सबको हैरान कर दिया. 15 साल से एक महिला सरकारी टीचर की नौकरी कर रही थी लेकिन उसको लेकर चौंकाने वाला ऐसा राज खुला जिसने सबको सन्‍न कर दिया अब स्‍थिति यह है कि इस घटना के बाद यूपी के सभी शिक्षकों की जांच होगी।

अदालत ने उन अधिकारियों को भी कड़ी चेतावनी दी है जिनकी मिलीभगत या लापरवाही की वजह से फर्जी शिक्षक सिस्टम में बने रहे. जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त वैधानिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया गया है.

15 साल की सेवा के बाद खुली पोल

देवरिया जिले की गरिमा सिंह को जुलाई 2010 में सलेमपुर ब्लॉक के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया था. वो लगभग 15 वर्षों से लगातार सेवा दे रही थीं, लेकिन 2025 में एक शिकायत पर हुई जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और अन्य अधिकारियों की जांच में पता चला कि गरिमा सिंह ने जिस शिक्षण दस्तावेज के आधार पर नौकरी हासिल की थी वो फर्जी थे यानी जिनके नाम पर उन्होंने डिग्री या प्रमाण पत्र दिखाए थे वो असली नहीं थे.इसके बाद मार्च 2025 में देवरिया के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने उनकी नियुक्ति रद्द कर दी. गरिमा सिंह ने अपनी बर्खास्तगी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी. उनके वकील ने तर्क दिया कि 15 साल सेवा देने के बाद नियुक्ति के समय दस्तावेजों का वेरिफिकेशन हो चुका था, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया.
हाईकोर्ट का सख्त फैसला और टिप्पणी
न्यायमूर्ति मनु श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि धोखाधड़ी से प्राप्त लाभ को लाभ उठाने वाला व्यक्ति किसी भी तरह की सुरक्षा या जांच का हकदार नहीं होता.अदालत ने गरिमा सिंह को बर्खास्त करने के साथ-साथ अब तक ली गई पूरी सैलरी की वसूली का भी आदेश दिया है.कोर्ट ने पूरे मामले को बहुत गंभीर माना और उत्तर प्रदेश सरकार को साफ निर्देश दिए कि राज्य भर में सभी सहायक अध्यापकों की नियुक्ति की व्यापक जांच की जाए. जांच छह महीने के अंदर पूरी करनी होगी.

अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी

अदालत ने उन अधिकारियों को भी कड़ी चेतावनी दी है जिनकी मिलीभगत या लापरवाही की वजह से फर्जी शिक्षक सिस्टम में बने रहे. जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त वैधानिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया गया है.

छात्रों के भविष्य पर गहरी चिंता

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता न केवल धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की नींव पर प्रहार करती है. अदालत के अनुसार छात्रों का हित सर्वोपरि है और अयोग्य शिक्षकों द्वारा बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा को कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता.



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