ये स्कूल भी जर्जर, हर समय हादसे का डर
लखनऊ। राजधानी में कई माध्यमिक स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके हैं। दीवारों और छत्तों को हालत ऐसी कि कभी भी ढह जाएं। यहां पढ़ने वाले बच्चे जान हथेली पर रखकर स्कूल आते हैं। बरसात के मौसम में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यहां कभी भी जीजीआईसी नरही जैसा हादसा हो सकता है। यहीं दूसरी ओर इन स्कूलों का प्रबंधन फंड की कमी का रोना रोता है। फोस वसूल नहीं सकते और सरकार की तरफ से ग्रांट मिलने का प्रावधान है नहीं।
जर्जर प्राइमरी सेक्शन करना पड़ा बंद हुसैनगंज स्थित चुटकी भंडार गर्ल्स कॉलेज की हालत भी किसी से छिपी नहीं है। विद्यालय का प्राइमरी सेक्शन जर्जर होने की वजह से बंद कर दिया गया है। प्रबंधन ने इसे जर्जर घोषित कराने का काफी प्रयास किया। न्यायालय की शरण में भी गए, लेकिन विभाग ने इसमें ज्यादा रुचि नहीं ली। इस विद्यालय की नीव महात्मा गांधी ने वर्ष 1921 में रखी थी। वहीं नरही स्थित सहाय सिंह बालिका इंटर कॉलेज के भवन का भी कुछ हिस्सा खस्ताहाल है। सीमित जगह व संसाधन होने के चलते इसकी मरम्मत तक नहीं हो पाती। यहां भी छात्राओं की संख्या में इजाफा नहीं हो पा रहा है।
दो मंजिला स्कूल, पहली मंजिल पूरी तरह से बंद लालबाग स्थित लखनऊ इंटरमीडिएट स्कूल करीब 82 साल पुराना है। दो मंजिला इस स्कूल में पहली मंजिल सभी कमरे खस्ताहाल होने के चलते बंद कर दिए गए हैं। सभी प्रयोगशालाएं पहली मंजिल पर ही हुआ करती थी। कई वर्ष पहले छत बहने के बाद से प्रयोगशालाओं समेत सभी कमरों में ताला जड़ दिया गया। सीढ़ियों तक कई जगह से टूट गई है। यही भूल के 10 कमरों में से भी अधिकांश जर्जर है। वर्ष 2016 में प्रबंधन ने इसे बहाने का प्रयास भी किया। तब से मामला विवादित चल रहा है। भवन खस्ताहाल होने के चलते हर साल छात्रों की संख्या गिरती जा रही है। अब यहां मुश्किल 90 हो पढ़ते हैं।

