उत्तर प्रदेश के कानपुर समेत आसपास के शहरों उन्नाव, महोबा, चित्रकूट, बांदा, हरदोई, हमीरपुर, फतेहपुर, जालौन, औरैया, इटावा, कन्नौज आदि में बिगड़े मौसम ने तीन दिन में सीजन की सामान्य बारिश का आंकड़ा सुधार दिया। मौसम विभाग के अनुसार बारिश के इस सीजन में तीन दिन पहले तक 739 मिमी बारिश हुई थी। बुधवार से शुक्रवार के बीच 113.7 मिमी बारिश होने के बाद यह आंकड़ा 852.7 मिमी पहुंच गया है। महानगर में पूरे सीजन में सामान्य बारिश का आंकड़ा 870 मिमी है। इस हिसाब से 17.3 मिमी बारिश की जरूरत अभी और है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसूनी बारिश के आखिरी माह सितंबर में अब तक कुल 181.9 मिमी हुई है। अभी करीब 10 दिन तक मानसून सक्रिय रहेगा। पूरी संभावना है कि इस बीच, कभी धूप तो कभी बारिश हो सकती है।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन पांडेय ने बताया कि हवा के कम दबाव वाला क्षेत्र फिर से बनने लगा है।
यही वजह है कि बादल तेजी से बन रहे हैं। बीच बीच में धूप के साथ दिन के तापमान में बढ़ोत्तरी भी दर्ज की जाएगी। उनके अनुसार, शनिवार तड़के दो मिली बारिश हुई।
बादल होने से धूपछांव के साथ महानगर और आसपास के जिलों में बूंदाबांदी का दौर अभी चलते रहने की उम्मीद है। शनिवार को अधिकतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस की उछाल के साथ 32.2 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं रात का तापमान एक डिग्री की बढ़त के साथ 25.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया।
जब सितंबर में हुई रिकॉर्ड बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, दस साल पहले सितंबर 2010 में रिकॉर्ड 322.2 मिमी बारिश हुई थी। इसके बाद वर्ष 2018 में सितंबर माह में 237 मिमी बारिश हुई थी।
चक्रवाती हवाओं की चाल ने कानपुर परिक्षेत्र समेत पूरे प्रदेश को बारिश से सराबोर कर दिया। बुधवार दोपहर से लेकर गुरुवार रात तक कभी रिमझिम तो कभी मूसलाधार बारिश होती रही। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थित मौसम विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक एक दिन में (16 सितंबर को) कानपुर परिक्षेत्र में 15 साल बाद इतनी बारिश (90 मिमी) हुई है।
इससे पहले 2005 में 69.4 मिमी बारिश हुई थी। शुक्रवार को भी ऐसी ही झमाझम बारिश के आसार हैं। बंगाल की खाड़ी में एक और निम्न दबाव के संकेत मिल रहे हैं। यह बारिश रुकने के कुछ दिनों बाद फिर इसी तरह झोंका आ सकता है।
सीएसए के मौसम विभाग के प्रभारी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में जो निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ था, वह अब खिसक कर मध्य यूपी पर आ गया है। इसके साथ ही बादलों की शृंखला राजस्थान से लेकर यूपी के ऊपर होते हुए बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है।

