नई दिल्ली। बार-बार अनुशासनहीनता पर विद्यार्थी को फटकार लगाना, उसकी हरकत को अभिभावकों की नजर में लाना, एक शिक्षक की जिम्मेदारी है। वह ऐसा अपने विद्यार्थी के उज्ज्वल भविष्य के लिए करता है। अगर इससे तंग आकर कोई छात्र आत्महत्या कर ले तो इसमें शिक्षक को उसे उकसाने के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के एक शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मामले को खारिज करते हुए मंगलवार को यह टिप्पणी की।
जस्टिस एस अब्दुल नजीर और कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा, स्कूल का एक अनुशासन होता है। शिक्षक ने जो भी किया वह स्कूल के अनुशासन को बरकरार रखने और बच्चे में सुधार लाने के लिए जरूरी था अगर कोई बच्चा इतना भावुक हो जो बार-बार क्लास बंक करने वाले 14 साल के एक बच्चे ने स्कूल में डांट पड़ने और घरवालों को इसके बारे में बताए जाने के बाद खुदकुशी कर ली थी। सुसाइड नोट में लिखा कि टीचर की डांट से आहत होकर ऐसा कर रहा है। शिक्षक ने राजस्थान हाईकोर्ट में इस आधार पर दर्ज केस खारिज करने की अपील की जिसे अदालत ने ठुकरा दिया। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
इसके बाद कोई गलत कदम उठाये तो इसके लिए शिक्षक को जिम्मेदार ठहराना गलत है।

