एक माह बाद भी भी अब तक महज कुछ ही बच्चों अधिकतर बच्चों के अभिभावकों का सत्यापन हो का नहीं हो सका
मंझनपुर। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत यूनिफार्म, स्वेटर और जूते-मोजे की राशि भेजे जाने का शासनादेश पिछले महीने जारी हुआ था। लेकिन एक महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अब तक महज कुछ ही बच्चों के अभिभावकों का सत्यापन जो सका है ऐसे मे बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं बिना यूनिफॉर्म के स्कूल पहुंच रहे हैं
जिले के परिषदीय स्कूलों में वर्तमान शिक्षा सत्र में एक लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। इन अब तक नहीं मिल पाई है। इसी तरह अक्तूबर में वितरण होने वाले स्वेटर, जूते-मोजे, बैग भी नहीं मिले हैं। 20 सितंबर को जारी हुए शासनादेश में इस बार बच्चों के अभिभावकों के खाते में यूनिफार्म, स्वेटर और जूते-मोजे की धनराशि सीधे भेजने का फैसला लिया गया है। इसलिए बेसिक शिक्षा विभाग ने अभिभावकों के प्रमाणित आधार नंबर से संबंधित डाटा पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) पोर्टल पर अपलोड करने का काम शुरू कर दिया है। विभागीय अफसरों के अनुसार अब तक 80 हजार से अधिक बच्चों के अभिभावकों का सत्यापन कर फीडिंग का काम पूरा कर लिया है। शेष का काम कराया जा रहा है। • विभाग का दावा है कि जल्द ही धनराशि भेजने का काम भी शुरू होगा।
डीबीटी के तहत बच्चों के अभिभावकों के बच्चों को जुलाई-अगस्त तक दो खाते में भेजी सेट में मिलने वाली यूनिफार्म जाएगी धनराशि
खाते में भेजे जाएंगे 1100 रुपये
मंझनपुर। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल के प्रत्येक बच्चे को दो सेट यूनिफार्म (कीमत 600 रुपये), स्वेटर (200 रुपये), एक जोड़ी जूता व दो जोड़ी मोजा (125 रुपये), स्कूल बैग (175 रुपये) वितरित किए जाते थे। अब यह कुल 1100 रुपये अभिभावकों के खाते में सीधे भेजी जाएंगे। अभिभावकों को खुद बच्चों के लिए यूनिफार्म खरीदनी होगी।
कहां गए पिछले वर्ष मिले यूनिफार्म
मंझनपुर। जिले में बेसिक स्कूलों के एक लाख से अधिक बच्चों को जूते-मोजे, यूनिफार्म, बैग का इंतजार है। सब कुछ निःशुल्क मिलने से बेसिक स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ रही है। शासन स्तर से ही सीधे बच्चों के खाते में रुपये हस्तांतरित किए जाएंगे। पिछले साल यूनिफॉर्म भी बांटी गई थी। तब से स्कूल बंद थे। सवाल उठता है कि अब खुले स्कूल खुले हैं तो पिछले साल की यूनिफार्म यदि बांटी गई तो बच्चे पहनकर क्यों नहीं आ रहे हैं।
