स्थाई समाधान से कम कुछ भी मंजूर नहीं: विजय
एटा। शुक्रवार को अलीगंज द्वारा शिक्षामित्रों की मानदेय वृद्धि की घोषणाओं से शिक्षामित्रों में आक्रोश व्याप्त है। शिक्षामित्रों का कहना है मामूली मानदेय वृद्धि से उत्तर प्रदेश के शिक्षा मित्र का अपमान किया जा रहा है। आक्रोशित शिक्षामित्रों ने बीआरसी कार्यालय अलीगंज पर विरोध प्रदर्शन भी किया।
शिक्षा मित्र संघ के जिला उपाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह ने कहा बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षामित्र बीते 20 वर्ष से सेवाएं दे रहा है। पिछली अखिलेश सरकार ने इनको सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किया था तब शिक्षामित्रों को लगभग 40 हजार रूपये का वेतन मिल रहा था 25 जुलाई 2017 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार की लचर पैरवी के चलते सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों का
समायोजन रद्द कर दिया और पुनः शिक्षामित्र पद पर वापस भेज दिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय मात्र दस हजार रूपये कर दिया। तब से लगातार शिक्षामित्र उत्तर प्रदेश सरकार से अपने स्थाई समाधान की मांग कर रहा है। इस दौरान अवसाद से चलते लगभग पांच हजार शिक्षामित्र अपने प्राणों की आहुति भी दे चुके हैं लेकिन भाजपा
सरकार ने शिक्षामित्रों के लिए अपनी संवेदना व्यक्त नहीं की। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में 2017 में स्थाई समाधान की बात कही थी। लेकिन चुनावी सत्र में भारतीय जनता पार्टी अपने वादे से मुकर गई और एक बार फिर मामूली मानदेय वृद्धि का झुनझुना शिक्षामित्रों को थमा दिया। शिक्षामित्रों को मानदेय नहीं स्थाई समाधान चाहिए। अगर उत्तर प्रदेश सरकार ने समय रहते स्थाई समाधान नहीं किया तो इसका खामियाजा 2022 में भारतीय जनता पार्टी को भुगतना पड़ेगा। ध्यान रहे उत्तर प्रदेश में एक बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा मित्र कार्यरत हैं। महिला मोर्चा की महामंत्री नीलम राठौर ने भी मानदेय वृद्धि को शिक्षामित्रों का अपमान बताया और कहा कि सरकार शीघ्र स्थाई समाधान करें। उत्तर प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा अगर स्थाई समाधान नहीं हुआ तो शिक्षामित्र भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मतदान करेगा मानदेय वृद्धि पर विरोध करने वालों में विजय कुमार, मीना बेगम, मीनू शाक्य, प्रीति सक्सेना आदि लोग उपस्थित थे।
