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Thursday, December 2, 2021

फंदे से लटक कर स्कूल प्रबंधक ने दी जान

 परिवार में प्रबंधकीय विवाद बनी वजह, अहलादपुर मरकड़ी गांव का मामला

रुद्रपुर नगर से सटे अहलादपुर मरकड़ी गांव के एक स्कूल प्रबंधक ने फंदे से लटक कर जान दे दी। घटना के पीछे पारिवारिक विवाद बताया जा रहा है। घटना स्थल से मिले सात पेज के सुसाइड नोट की पुलिस जांच कर रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।



अहलादपुर मरकड़ी गांव के हरिश्चंद्र यादव के छोटे पुत्र अमित यादव (35) मझने पुल के समीप स्थित एलबीआर स्कूल के प्रबंधक थे। उन्होंने चार साल पहले स्कूल की स्थापना की थी और उसका संचालित कर रहे थे। स्कूल में उत्तराधिकार के मुद्दे पर परिवार में विवाद पैदा हो गया। सोमवार की रात स्कूल परिसर में स्थित आवास के कमरे में करीब नौ बजे पत्नी ने फंदे से लटकता शव देख शोर मचाना शुरू किया। रस्सी का फंदा बना कर छत की कुंडी से वह लटक गए थे।


बगल में मेज पर सुसाइड नोट मिला। उसमें छह पेज लाल और एक पेज नीली स्याही से लिखा है। उन्होंने आत्महत्या की वजह स्कूल का विवाद बताया है। परिजनों से स्कूल के मुद्दे पर एक महीने से मनमुटाव चल रहा है। प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र सिंह ने कहा कि मिले सुसाइड नोट की लिखावट और परिस्थिति की जांच की जा रही है। घटना के पीछे सुसाइड नोट के मुताबिक प्रबंधकीय विवाद है। पुलिस गहनता से जांच कर रही है। अभी कोई तहरीर नहीं मिली है।


पिता और भाई को बताया आत्महत्या के लिए जिम्मेदार : अमित ने आत्महत्या से पहले दर्द भरा सुसाइड नोट लिखा है। उसमें कहा है कि 11 नवंबर 2013 को यहां रुद्रपुर में अपने गांव में स्कूल खोला। नौ मार्च 2017 में इसकी ओपनिंग हुई। एक बच्चे से 450 बच्चे तक पहुंचाया। नौ साल बीत गए, त्योहार तक नहीं मनाया। इधर हमारे भाई ने पिताजी को मिलाकर स्कूल पर कब्जा कर लिया है। स्कूल हमारे लिए एक मंदिर है। आंखों के सामने सब कुछ बर्बाद होते नहीं देख सकता। मुझे पता है आज लालच के कारण पिताजी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। भइया ने उनको मिलाकर सब कुछ अपने कब्जे में ले लिया है। हम नहीं चाहते कि दुनिया तमाशा देखे। स्कूल ही हमारा सपना था। लेकिन हमारे भाई एवं पिताजी ने मिलकर इसे पैसा जमा करने का अड्डा बना लिया है। दस दिन से स्कूल नहीं जा रहे हैं। परिवार ने हमें


धोखा दिया है। ऐसा बाप किसी को नहीं मिले। उधर, अमित के पिता हरिश्चंद्र यादव का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान स्कूल बंद होने से काफी लोगों का पैसा बकाया हो गया था। कॉपी-किताब, ड्रेस और गाड़ी की ईएमआई बाकी हो गई थी। उसके कारण अमित काफी तनाव में था कर्ज चुकाने के लिए पैसे मांग रहा था। हम लोगों ने कहा कि अगर स्कूल तुम नहीं चला पा रहे हो, तो तुम अपने भाई को दे दो, वह चलाएगा। 

नीतू माफ करना, बेटी का ख्याल रखना...

प्रबंधक अमित यादव के शव के पास मिले सात पेज के सुसाइड नोट में उन्होंने आत्महत्या के लिए पत्नी नीतू से माफी मांगी है। सुसाइड नोट में लिखा है- नीतू मुझे क्षमा करना, बेटी का ख्याल रखना मेरे शरीर को बेटी आराध्या ही मुखाग्नि देगी, तो मुझे शांति मिलेगी। मेरा सपना है, बेटी अधिकारी बने। परिजन बेटी को उसका हक, अधिकार जरूर दे देंगे।




स्कूल प्रबंधकों ने जताया शोक

प्रबंधक के निधन पर नगर के स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया। प्रबंधकों ने शोक सभा कर गतात्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। प्रबंधक राणा प्रताप सिंह, संजय यादव, सत्राजीत मणि, डीएन सिंह, राधेश्याम निगम, रामभगत शर्मा आदि ने शोक संवेदना व्यक्त की।

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