'गुरुजी' को रास नहीं आ रही वीडियो कॉलिंग आदेश आते ही शिक्षक करने लगे विरोध, मुख्यमंत्री व बेसिक शिक्षा मंत्री से आदेश निरस्त करने की मांग
अमृत विचार : योगी सरकार मानती है कि राजधानी सहित प्रदेश भर के सरकारी विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ेगी तो गरीब बच्चों का भविष्य भी उज्जवल होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए काफी बदलाव किए जा रहे हैं। लेकिन इनमें कुछ ऐसे बदलाव हैं जो 'गुरू जी को रास नहीं आ रहे हैं। स्थिति ये है कि शिक्षा महानिदेशक के आदेश पर अमल की बजाय शिक्षक उल्टे उन्हें आईना दिखा रहे हैं।
दरअसल शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद ने बीती 24 अप्रैल को सभी जिलों के बीएसए और डॉयट प्राचार्यों को आदेश जारी कर मूल्यांकन प्रकोष्ठ का गठन करने का निर्देश दिया है। निर्देश में मूल्यांकन प्रकोष्ठ का उद्देश्य जो बताया गया है उससे शिक्षक बहुत परेशान हो रहे हैं।
शिक्षा महानिदेशक का कहना है कि पूरे प्रदेश में निपुण भारत मिशन को लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास जारी है। लेकिन ऐसा पाया गया है कि इस लक्ष्य की पूर्ति में कुछ शिक्षक बाधा बन रहे हैं। इनमें कई ऐसे भी हैं जो विद्यालय समय से नहीं पहुंचते हैं और पहुंचते हैं तो पढ़ाई में रुचि नहीं ले रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों से बच्चों को शैक्षिक वातावरण कैसे मिले इसे लिए उन्हें प्रेरित करने का प्रयास डॉयट स्तर पर गठित मूल्यांकन प्रकोष्ठ करेंगे। वह विद्यालयों में वीडियो कॉलिंग कर पढ़ाई के माहौल को सभी समझेंगे, लेकिन गुरुजनों को यही बात न गवार गुजर रही है। इसके साथ ही शिक्षक अन्य विभाग में ये व्यवस्था क्यों नहीं लागू की गई उल्टे डीजी से ही सवाल पूछ रहे हैं। ऐसे कई सवाल व्हाटसएप यूनिवर्सिटी में चल रहे हैं। दिसंबर 2022 से मार्च 2023 तक 20 हजार शिक्षक अनुपस्थित बता दें कि शिक्षा महानिदेशक की निर्देश पर विभाग के क्लास वन अफसरों की टीम ने जिलों में जाकर स्कूलों को चेक किया तो अलग-अलग करीब 20 हजार शिक्षक अनुपस्थित पाए गए ऐसी स्थिति में निपण भारत
मिशन का लक्ष्य कैसे पूरा होगा इस पर जब शिक्षको की जवाबदेही तय की जा रही है तो विरोध जारी है।
यह है डीजी का आदेश
शिक्षा महानिदेशक ने आदेश में कहा है कि प्राय: यह देखने में आया है कि विद्यालय की अकादमिक गतिविधियों में शिथिलता पाई जाती है। समय सारिणी का सही पालन नहीं होता है तथा शिक्षकों के द्वारा शिक्षाणार्थ अपेक्षित सयम तथा प्रतिबद्धतापूर्वक लक्ष्य प्राप्ति के लिए कार्य निष्पादन के लिए प्रवृत्ति नहीं दर्शायी जाती है। ऐसे में खंड शिक्षा अधिकारियों की भी लापरवाही दिख रही है। इसलिए प्रभावशाली संचालन की निगरानी की आवश्यकता है। सभी जिलों में मूल्यांकन प्रकोष्ठ गठित किए जायेंगे। इस प्रकोष्ठ में डॉयट प्राचार्य, वरिष्ठ प्रवक्ता, एक पुरुष व एक महिला प्रवक्ता को शामिल किया गया है। प्रकोष्ठ की ड्यूटी होगी कि वह समय-समय पर शिक्षकों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करेंगे और साथ ही वीडियो काल के जरिए शिक्षण कार्य को भी देखेंगे। इसके लिए एक पूरा प्रो फार्मा भी जारी किया गया है। इस स्थिति में किसी भी शिक्षक की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जायेगी।


