अंतर्जनपदीय स्थानांतरण आदेश के बाद बना स्वास्थ्य प्रमाण पत्र होगा अमान्य
• 142 परिषदीय शिक्षकों ने लगाया है। असाध्य रोगी होने का प्रमाण पत्र
• आज सभी की मेडिकल बोर्ड के समक्ष होनी है सेहत की जांच
जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर
: बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए जारी आदेश के बाद असाध्य रोग का प्रमाण पत्र बने होने पर मान्य नहीं होगा। इसके लिए विभाग ने बीएसए को दिशा निर्देश उपलब्ध कराया है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि ऐसे प्रमाण पत्रों को न माना जाए जो आदेश जारी होने के बाद बने हैं। साथ ही मेडिकल बोर्ड के समक्ष उन शिक्षकों को उपस्थित होने से छूट मिलेगी जो अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करा रहे हों। इससे जुड़ा प्रमाण पत्र उन्हें बीएसए कार्यालय को उपलब्ध कराना होगा। आवेदन कर चुके सभी शिक्षकों को मेडिकल बोर्ड 'के समक्ष मंगलवार को उपस्थित होना है। जांच के लिए सीएमओ ने तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया है।
इसमें डिप्टी सीएमओ डा. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ डा. वीएन चतुर्वेदी व हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. आरिफ अतहर शामिल हैं। जिले के 142 शिक्षकों ने असाध्य रोग होने का प्रमाण पत्र आवेदन में लगाया है। इनमें कैंसर, हृदय रोग, डायलिसिस व गुर्दा प्रत्यारोपण, गुर्दा - रोग, घुटने व कुल्हे का बदलाव, प्रोस्टेट ग्लँड सर्जरी, कार्निया प्रत्यारोपण जैसी समस्या से खुद, पति या बच्चों को रोगग्रस्त बताया है। जबकि 63 शिक्षकों ने दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी अपने आवेदन में लगा रखा है। रोगग्रस्त को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होना है। बेसिक शिक्षा विभाग ने गैर जनपद में स्थानांतरण के इच्छुक शिक्षकों से आनलाइन आवेदन मांगा था। जिले में तैनात करीब तीन हजार शिक्षकों ने आवेदन किया है।
आकांक्षी जनपद में शुमार सिद्धार्थनगर में गैर जनपद के साढ़े चार हजार शिक्षक कार्यरत हैं। शासन ने स्थानांतरण प्रक्रिया में मेरिट तय कर रखा है। इसमें सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले शिक्षकों का ही स्थानांतरण का लाभ मिलना है। ऐसे में विभाग को उम्मीद है कि कुछ मेडिकल प्रमाण पत्रों फर्जी हो सकते हैं।
ऐसे गैर जनपद जाने में मिलेगी सहूलियत : आवेदन करने वालों में महिला शिक्षक होने पर 10 अंक अतिरिक्त, पति या पत्नी के गैर जनपद में सेवारत होने पर 10 और असाध्य रोग होने पर 20 अंक अतिरिक्त मिलना है।
स्थानांतरण प्रक्रिया के शुरू होने के बाद बने असाध्य रोग के प्रमाण पत्र मान्य नहीं होंगे। यदि किसी का पहले से इलाज चल रहा तो उससे जुड़े साक्ष्य विभाग को देने होंगे। 'इसकी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। देवेंद्र कुमार पांडेयं, बीएसए

