82 साल के शिक्षक राम किशोर साहू 33 देशों की यात्रा कर चुके; जब वेतन ₹50 था तब से बचा रहे पैसे
13 साल की उम्र में जब छठी क्लास में राम किशोर साहू पढ़ते थे, तो एक सपना देखा दुनिया घूमने का। छठी कक्षा के अध्यापक त्रिवेणी राम साहू ने लेखक संताराम की एक कहानी पढ़ाई- 'इग्लैंड में देखी गई अच्छाइयां'। अच्छाइयों की इस कहानी में सवेरे इंग्लैंड का एक दुकानदार सड़क किनारे दरी बिछाकर अपनी चीजें सजा देता है। कोने में संदूक रखता है। लिखता है मनपसंद चीजें ले जाएं और इसकी कीमत बक्से में डाल दें। शाम में जब दुकानदार वापस उस सड़क किनारे पर आता तो खरीदे गए सामान के पूरे पैसे बक्से में पाता। इंग्लैंड के लोगों की ईमानदारी देख राम किशोर साहू काफी प्रभावित हुए और अपने शिक्षक त्रिवेणी राम साहू से कहा कि मास्टर जी मैं भी एक दिन इंग्लैंड जाऊंगा। इस पर त्रिवेणी राम साहू ने वहां तक पहुंचने के खर्चे के बारे में बताया।
तब उन्होंने संकल्प लिया कुछ भी हो जाए लेकिन मैं पूरी दुनिया घूमूंगा। आज 82 साल की उम्र में 33 देश का भ्रमण कर चुके हैं। 50 रुपए जब वेतन था, तब से दुनिया घूमने के पैसे बचा रहे हैं। शिक्षक के रूप में रिटायरमेंट के बाद पत्नी लालमणी देवी के साथ विदेश जाने का सपना पूरा किया। तमाड़ के सारजमडीह के रहने वाले राम किशोर साहू ने प्राथमिक शिक्षा गांव के स्कूल से पूरी की। बाद में तमाड़ हाई स्कूल से 1960 में मैट्रिक पास की। 1964 में पचास रुपए के वेतन से शिक्षक की नौकरी शुरू की। 1974 में हेडमास्टर बने तब उनकी सैलरी 700 रुपए थी। सैलरी का आधा भाग राम किशोर घूमने के लिए शुरू से ही जमा करते रहे। सितंबर 2002में रिटायरमेंट के बाद विश्व यात्रा के क्रम में सबसे पहले सिंगापुर गए। इसके पहले पूरे देश का भ्रमण कर चुके थे। विश्व भ्रमण के पहले राम किशोर साहू अंतरराष्ट्रीय टूरिस्ट कंपनी से संपर्क करते हैं और तय पैकेज के हिसाब से यात्रा शुरू करते हैं। इस दौरान यात्रा की पूरी जिम्मेदारी कंपनी पर होती है। तय स्थानों पर घुमाने के बाद कंपनी एयरपोर्ट तक छोड़ देती है।
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