तुगलकी फरमानः यहां जान के लाले पड़े, डीजी को समर कैंप की पड़ी!
आईएएस व आईपीएस को देश की रीढ़ माना जाता है। सरकार किसी भी पार्टी की हो लेकिन देश पर राज आईपीएस व आईएएस ही करते हैं। वे ही कानून की ड्राफ्टिंग कराते हैं और कानून में लोकुना भी छोड़ते हैं। यही कारण है कि आईएएस की बुद्धि की दाद दी जाती हैं लेकिन आजकल आईएएस भी कुछ ऐसे निर्णय ले लेते हैं कि उनकी बुद्धि पर तरस आता है। आज के समय में उत्तर व मध्य भारत में आसमान से जमीन पर आग के गोले बरस रहे हैं। पारा 52 डिग्री तक जा पहुंचा है। मजदूरों की 12 से 3 तक काम करने की मनाही कर दी गई है। सूरज के सितम से यूपी, दिल्ली, बिहार, राजस्थान व मध्यप्रदेश में 150 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। दरोगा तक गर्मी नहीं झेल रहे हैं।
नागरिक सुरक्षा निदेशालय ने लोगों को घरों से न निकलने की सलाह दी है। धरती आग की भट्टी बनी हुई है। ऐसे में यदि निदेशालय यह आदेश जारी करे कि एक सप्ताह तक प्राइमरी स्कूलों में समर कैम्प का आयोजन किया जाए तो इसे तुगलकी आदेश ही करार दिया जाएगा। वही इस आदेश को उस समय बचकाना और आई ए एस की बुद्धि पर तरस खाने वाला ही कहा जायेगा जब, स्कूलों में ग्रीष्म कालीन अवकाश चल रहे हो। उत्तर प्रदेश की शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा ने पर्यावरण निदेशालय के आदेशों का हवाला देते हुए राज्य के सभी जनपदों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी स्कूलों में 5 जून से 11 जून 2024 तक एक सप्ताह का समर कैंप लगाया जाए। जिसमें अलग अलग दिनों में अलग अलग कार्यक्रम कराए जाएं। डीजी के इस आदेश को तुगलकी आदेश करार दिया जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि वरिष्ठ आईएएस होने के बाद भी डीजी कंचन वर्मा ने वह नही सोचा कि जब राज्य में 21 मई से 15 जून तक ग्रीष्म कालीन अवकाश है। 16 को रविवार और 17 की बकरीद की छुट्टी है, तो कैसे बच्चों को समर केम्प में बुलाया जा सकता है? भीषण गर्मी में सरकारी निदेशालय लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दे रहा है। ऐसे में कंचन वर्मा नन्हे बच्चों को आग की भट्टी में कूदने को क्यों कह रही है?
कंचन वर्मा को यह भी ज्ञात होना चाहिए कि छुट्टी घोषित होते ही बच्चे अपनी बुआ, मामा या अन्य रिश्तेदारी में या फिर ठंडी जगह पर चले जाते हैं।
- ऐसे में आपके बंधुआ मजदूर अध्यापक उन्हें कहा - से और कैसे बुलाकर लाएंगे? पता नहीं डीजी - महोदया यह जानती है या नहीं कि समर कैंप का - आयोजन अप्रैल माह में (छुट्टी पड़ने से पहले) स्कूल परिसर में ही विभिन्न सुविधाओं के साथ - होता है। जिसमें जल क्रीड़ा से लेकर एडवेंचर हर * तरह की गतिविधि होती है। इसका आयोजन - विद्यालय परिवार कान्वेंट स्कूल में अपने खर्चे पर - करते हैं और माता पिता से भी शुल्क वसूल करते - हैं। उसके बाद सभी सुविधाएं स्कूलों में मुहैया कराई जाती हैं। अधिकतर कान्वेंट स्कूलों में अपने - स्विमिंग पूल भी है और एसी ऑडिटोरियम भी। आप गांव व देहात के स्कूलों में उनकी नकल कर रही है, वह भी उस समय में जब पारा 50 पार है। - जवान लोग ही हीट स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में मासूम बच्चों को मौत के मुंह में कैसे धकेला - जा सकता है? आपका यह आदेश अव्यवहारिक तो कहा ही जायेगा, साथ ही बच्चों की जान लेवा भी साबित हो सकता है। सवाल पैदा होता है कि समर कैंप जरूरी है या फिर बच्चों की जान ? -
डीजी के इस तुगलकी आदेश को बेसिक शिक्षा - के उन अध्यापकों के अधिकार हनन के रूप में - भी देखा जा सकता है, जिन्हें साल में गिनी चुनी - ग्रीष्म अवकाश की ये ही छुट्टी मिलती है। एक- एक छुट्टी के लिए शिक्षक परेशान होता है। - अन्य विभागों में 14 सीएल है, 34 इएल है। जिन्हें वह जब चाहे ले सकते हैं, जहाँ चाहे - जा सकते हैं। कुल 48 छुट्टियां है, जिसे कर्मचारी अपनी सुविधानुसार ले सकते हैं। - अगर बच गई तो वे अगले साल में जुड़ जाती है। अगर नही लेते तो उसके बदले पैसे मिलते हैं। बेसिक के शिक्षक इन सब से महरूम है। उनके ग्रीष्म कालीन अवकाश भी डीजी की आंखों में खटकते है। वही बेसिक शिक्षा डीजी यह भी आंकलन करें कि आपके कितने विद्यालयों में पर्याप्त भवन है? क्या विद्यालयों - में कोई ऐसा बड़ा सुसज्जित व सुविधाओं से - युक्त हाल है, जिसमें समर कैंप क्राकर बच्चों को मौत के मुंह से बचाया जा सके ?
यह थोड़ी बुद्धि वाला भी सोच सकता है कि इस तरह के तुगलकी आदेश का मतलब क्या है? क्या बच्चे स्कूल आ जाएंगे? क्या आग की भट्टी में कोई अभिभावक अपने बच्चों को कूदने के लिए भेज देगा? क्या जानबूझकर - बच्चों को आग में धकेलने जैसा यह समर कैंप जरूरी है? वही यह भी सवाल डीजी से है कि यदि किसी के बच्चे या अध्यापक की जान चली गई तो क्या डीजी महोदया उनकी जान वापस ले आएंगी? इस तुगलकी फरमान को देखकर हर कोई कह रहा है कि पहले डीजी अपने बच्चों को एक सप्ताह समर कैंप रूपी मौत की भट्टी में भेजे फिर अन्यों को बुलाये। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष योगेश त्यागी, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय, महामंत्री संजय सिंह, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन एवं शिक्षक नेता नितिन पंवार व रोहित राणा ने शिक्षा निदेशक कंचन वर्मा से इस तुगलकी फरमान को वापस लेने का अनुरोध किया है।

