जिले के प्राइमरी तथा मिडिल स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली भोजन की राशि को हेडमास्टर डकार रहे हैं। बच्चों की उपस्थिति ज्यादा दिखाकर इस राशि में गबन किया जा रहा है। कई स्कूलों में भौतिक सत्यापन के दौरान एक भी बच्चे नहीं पाए जा रहे हैं। इस तरह एमडीएम की राशि में बड़े पैमाने पर गोलमाल हो रहा है। इस बात का खुलासा स्कूलों की जांच के दौरान हुआ है। स्कूलों की जांच के दौरान एमडीएम में अनियमितता बरते जाने को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी राजेंद्र सिंह ने 11 स्कूलों के हेडमास्टरों से जवाब तलब किया है। इन स्कूलों में एमडीएम पंजी संधारित नहीं पाया गया है। इस तरह इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि हेडमास्टर अपनी सुविधा के अनुसार एमडीएम पंजी का हिसाब भर कर राशि का उठाव कर लेते हैं। 18 अप्रैल को लकड़ी नवीगंज प्रखंड के नया प्राथमिक विद्यालय डुमरा, मध्य विद्यालय डुमरा, नया प्राथमिक विद्यालय डुमरा चंदेल टोला तथा उत्क्रमित मिडिल स्कूल चंदौली का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान इन चारों स्कूलों में एमडीएम बंद पाया गया था। यानी कि इस दौरान बच्चों के लिए एमडीएम नहीं बनाया गया होगा।
जांच के दौरान उपस्थित नहीं थे बच्चे
इसी तरह 13 अप्रैल को जीरादेई प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय फुलवरिया का निरीक्षण किया गया था। इस दौरान छात्र-छात्राएं उपस्थित नहीं पाए गए थे। जबकि राजकीय मध्य विद्यालय मिश्रौली में 205 छात्र-छात्राओं का नामांकन है, लेकिन निरीक्षण के दौरान एक भी बच्चे नहीं पाए गए थे। इसी तरह राजकीय मध्य विद्यालय हरिपुर का निरीक्षण किया गया था। इस स्कूल में 208 बच्चों का नामांकन है। रजिस्टर में 160 बच्चों की उपस्थिति दिखाई गई थी, लेकिन सत्यापन के दौरान मात्र 30 बच्चे पाए गए थे।

