लोकसभा चुनाव सातवें चरण की वोटिंग से ठीक पहले भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अच्छी खबर आयी है. देश की अर्थव्यवस्था के अच्छे प्रदर्शन की बदौलत वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी वृद्धि दर बढ़ कर 8.2 प्रतिशत हो गयी. इसके साथ ही भारत ने दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा. शुक्रवार 2022-23 में यह सात प्रतिशत रही थी.
पिछले वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही. एक साल पहले की समान तिमाही में वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत दर्ज की गयी थी. हालांकि अक्तूबर-दिसंबर, 2023 की तुलना में मार्च तिमाही की वृद्धि रफ्तार में नरमी आयी है. दिसंबर तिमाही में अर्थव्यवस्था 8.6% की उच्च दर से बढ़ी थी. इस तेजी के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था 3.5 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गयी.
आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर 6.2% पर
आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर अप्रैल में बढ़ कर 6.2% हो गयी. शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल महीने में प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद और बिजली का उत्पादन बेहतर होने का असर रहा है. मार्च में इन आठ उद्योगों की वृद्धि दर 6% थी, जबकि अप्रैल, 2023 में यह 4.6% रही थी. कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली को बुनियादी उद्योगों में गिना जाता है. उर्वरक क्षेत्र का उत्पादन अप्रैल में गिर गया जबकि कोयला, इस्पात और सीमेंट क्षेत्रों की वृद्धि दर में सुस्ती दर्ज की गयी. कोयला उद्योग की वृद्धि दर नरम पड़कर 7.5% रह गयी जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 9.1% थी. इस्पात उद्योग की वृद्धि दर 16.6% से घट कर 7.1% पर आ गयी.
कर राजस्व बेहतर, राजकोषीय घाटा अनुमान से कम
सरकार का राजकोषीय घाटा बीते वित्त वर्ष में जीडीपी का 5.63 प्रतिशत रहा. यह केंद्रीय बजट में जताये गये 5.8 प्रतिशत के अनुमान से कुछ कम है. वास्तविक रूप से राजकोषीय घाटा 16.53 लाख करोड़ रुपये यानी जीडीपी के प्रतिशत के रूप में 5.63 प्रतिशत है. फरवरी में पेश अंतरिम बजट में 2023-24 के संशोधित अनुमान में राजकोषीय घाटा 17.34 लाख करोड़ रुपये यानी जीडीपी का 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था. महालेखा नियंत्रक के आंकड़ों के अनुसार सरकार का राजस्व संग्रह बजट में संशोधित अनुमान का 101.2 प्रतिशत रहा. शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 23.36 लाख करोड़ रुपये जबकि व्यय 44.42 लाख करोड़ रुपये रहा.

