पांच-पांच हजार में बेचा था नेट का पेपर, परीक्षा से एक दिन पहले ही लीक हो गया था पर्चा, टेलीग्राम के जरिये देशभर में पहुंचाया गया
जागरण ब्यूरो, नई दिल्लीः गड़बड़ियों
के चलते यूजीसी नेट की पूरी परीक्षा
भले ही रद कर दी गई है, लेकिन परीक्षा को लेकर जिस तरह चीजें उजागर हो रही हैं, वे चौंकाने वाली हैं। परीक्षा माफिया के हौसले किस तरह बुलंद हैं, इसका अंदाजा नीट पेपर लीक विवाद के बीच दूसरे पेपर को लीक करने के उसके साहस से लगाया जा सकता है। परीक्षा माफिया ने यूजीसी नेट के पेपर को न सिर्फ परीक्षा से एक दिन पहले लीक किया, बल्कि उसे इंटरनेट पर टेलीग्राम एप से देशभर में पहुंचाया भी। कोचिंग संस्थानों के जरिये इसे छात्रों को पांच-पांच हजार रुपये में बेचा गया। यूजीसी नेट पेपर लीक मामले की शुरुआती जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पेपर लीक होने की जानकारी 17 जून को मिल गई थी। गृह मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय को जानकारी दी गई। हालांकि, पहले भी झूठी घटनाओं को प्रसारित होने की घटनाओं के कारण इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। ऐसे में परीक्षा अपने तय समय (18 जून) पर दो शिफ्टों में हुई। परीक्षा के बाद एनटीए ने भी परीक्षा के ठीक तरीके से होने का दावा किया, लेकिन सबके हाथ-पैर तब फूल गए जब टेलीग्राम पर मिले पेपर का परीक्षा के बाद यूजीसी नेट के दोनों शिफ्टों के पेपर से मिलान कराया गया। पता चला कि पहली शिफ्ट का पेपर और टेलीग्राम पर मिला पेपर हुबहू एक ही थे। इसके बाद एनटीए और शिक्षा मंत्रालय हरकत में आए। तब तक यूजीसी के पास भी पेपर लीक की जानकारी पहुंच गई थी, जिसे पांच-पांच हजार में कई शहरों में बेचे जाने की भी जानकारी मिली।
उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार नीट का पेपर लीक होने की घटना के बाद से मंत्रालय ने आगामी परीक्षाओं को लेकर साइबर एजेंसियों सहित दूसरी एजेंसियों को सतर्क कर रखा है। ऐसे में पेपर लीक होते ही तुरंत उसे पकड़ लिया गया। जांच में लंबा समय लग गया, अन्यथा परीक्षा को पहले ही रोका जा सकता था। सूत्रों का कहना था कि इसकी जांच का जिम्मा सीबीआइ को दे दिया गया है. ऐसे में इनमें कुछ भी बताना जांच को प्रभावित करना है।

