पटना। बिहार का चहक कार्यक्रम देश में अव्वल है। इसको एनसीईआरटी अन्य राज्य सरकारों को चलाने के लिए प्रेरित करेगी। इसके माध्यम से बच्चों में सीखने की क्षमता तेजी से बढ़ती है।
बिहार के सरकारी स्कूलों में इसे लागू किया गया है। इससे बच्चों के मानसिक विकास के साथ उनकी शैक्षणिक योग्यता भी है। एनसीईआरटी के अधिकारियों ने विभिन्न जिलों के सरकारी स्कूलों का दौरा करने के बाद रिपोर्ट दी है। बता दें कि जुलाई के पहले सप्ताह में एनसीईआरटी की टीम बिहार के 28 जिलों के 5,897 प्रारंभिक स्कूलों का दौरा किया था।
टीम में शामिल अधिकारियों ने विभिन्न स्कूलों में जाकर बच्चों और शिक्षकों से बात की। चहक कार्यक्रम के तहत दिये जाने वाले किट की जानकारी ली। यह काफी सकारात्मक रहा। बच्चे स्कूल में रहना पसंद कर रहे हैं और चहक कार्यक्रम के विभिन्न गतिविधियों को अच्छे से सीख रहे हैं। विषयवार किट बनाया गया है: चहक कार्यक्रम में गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी आदि विषय का किट बनाया गया है। इसे कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि बच्चे किसी भी विषय को जल्द सीख ले रहे हैं। संबंधित शिक्षक किट से ही बच्चों को
पढ़ाते हैं। पढ़ाने के बाद शिक्षकों को फीडबैक देना होता है कि कितने बच्चों को पढ़ाया और बच्चे सीखे की नहीं। वहीं बच्चों से हर 15 दिनों पर फीडबैक लिया जाता है।

