लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कराने के साथ ही सभी रिकार्ड ऑनलाइन करने पर शिक्षकों का विरोध तेज हो गया है।
आखिर ऐसा क्यों है आईए समझते हैं। वर्तमान में सरकार इस तरह का माहौल बना रही है जैसे शिक्षक अपने दैनिक कर्तव्यों को करना नहीं चाहता हो। मीडिया के माध्यम से शिक्षक बिरादरी को लेकर एक नकारात्मक माहौल बनाया जा रहा है लेकिन शिक्षक ऑनलाइन हाजिरी का विरोध क्यों कर रहे हैं इसको लेकर किसी समाचार पत्र एवं सामाजिक संगठन ने बात करना भी मुनासिब नहीं समझा है। यदि शिक्षकों की समस्याओं पर गौर किया जाए तो आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। एसी कमरों में बैठने वाले हुक्मरान यह नहीं जानना चाहते कि जी विद्यालय दुर्गम क्षेत्रों में है जहां आवागमन का कोई साधन नहीं है, पगडंडी वाली रास्ताएं हैं जहां किसी वाहन से चल पाना संभव नहीं है वहां अध्यापक कैसे पूरे वर्ष समय से पहुंचेगा। लोग प्रश्न उठाएंगे इस विषय पर कि इससे पहले कैसे पहुंच रहा था तो मैं इसे भी स्पष्ट करना चाहूंगा कि पूरे वर्ष निरंतर एक ही समय पर किसी भी व्यक्ति को एक जगह पर नहीं पहुंचाया जा सकता। प्रोबिलिटी कहती है कि कुछ विशेष दिवसों में शिक्षक की देरी हो सकती है। वह देरी बारिश के कारण हो सकती है, वह देरी बाढ़ के कारण हो सकती है, वह देरी प्राकृतिक आपदा के कारण हो सकती है, वह देरी रेलवे क्रासिंग के बंद होने से भी हो सकती है, वह देरी सड़क दुर्घटना के कारण हो सकती है। वह देरी सोमवार को फलों की टोकरी मोटर साइकिल पर लादकर ले जाने में हो सकती है।

