बर्तन खरीदने को शिक्षकों पर बनाया दबाव तो ‘खैर नहीं’
जागरण संवाददाता हरदोई: परिषदीय विद्यालयों में मध्याहन भोजन के लिए बर्तन खरीदने में बची लूट की दैनिक जागरण पोल खोली तो जिम्मेदारों में सनसनी फैल गई। अधिकांश विकास खंडों में खंड शिक्षा अधिकारियों के कारिंदों की मिलीभगत सामने आ रही है। भरावन विकास खंड में इसकी पुष्टि भी हो गई है। बीएसए ने बीआरसी पर तैनात रहे कर्मचारी को कार्यमुक्त कर दिया है और जांच कराने की बात कही है। बीएसए ने बताया कि उनके नाम पर कोई भी बर्तन लेने का दबाव बनाता है तो जानकारी दें। अध्यापक अपनी जरूरत के हिसाब से बर्तन खरीदें। कोई दबाव बनाता है तो उसकी खैर नहीं।
विद्यालयों में बर्तनों की कमी से बच्चों का मिड-डे मील प्रभावित हो रहा था और उसी परेशानी को दूर करने के लिए मध्याहन भोजन प्राधिकरण की तरफ से 3005 विद्यालयों के लिए बच्चों की संख्या के अनुसार धनराशि जारी की गई थी। मध्याह्न भोजन निधि के खाते में भेजी गई धनराशि से प्रधानाध्यापकों को जरूरत के हिसाब से बर्तन खरीदने
थे, लेकिन उसमें कमीशनबाजी के चक्कर में मनमानी की जा रही है और अध्यापकों को बर्तन खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कहीं खंड शिक्षा अधिकारी की फर्म तो कोई बीएसए का आदेश बताते हुए बर्तन थोपे जा रहे हैं। दैनिक जागरण ने इस खेल को सोमवार के अंक में प्रमुखता से उठाते हुए जिम्मेदारों को घेरा तो खलबली मच गई। बीएसए की फर्म बताते हुए बर्तन भेजने के मामले को बीएसए विजय प्रताप सिंह ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने किसी भी फर्म को अधिकृत नहीं किया है। भरावन के 70 विद्यालयों में जबरन बर्तन भेजने में बीआरसी पर तैनात कर्मचारी की भूमिका पता चली, जिस पर तत्काल प्रभाव से उसे विद्यालय के लिए कार्यमुक्त कर दिया
गया है। पूरे मामले की जांच भी कराई जा रही है और भी इसमें जो कोई शामिल मिला उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। बीएसए ने बताया कि अगर विद्यालय में कोई उनके या किसी अन्य अधिकारी के नाम पर बर्तन पहुंचाता है तो शिकायत करें। संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी। अध्यापकों ने जागरण का जताया आभारः विद्यालयों में निर्माण या किसी सामग्री की खरीद में अध्यापकों को कितना परेशान किया जाता है, यह सोमवार को दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद अध्यापकों द्वारा जागरण के जताए जा रहे आभार से साफ हो रहा है। दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के साथ कई अध्यापकों ने जागरण प्रतिनिधि को आभार भेजा। इतना ही नहीं कुछ अध्यापकों ने फोन कर बताया कि सर, ऐसे ही हम लोग परेशान किए जाते हैं।

