परीक्षा नियामक कार्यालय से ही नहीं आईं 1900 शिक्षकों की मार्कशीट
उन्नाव। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) से तीन बैच के शिक्षकों के अंकपत्र की मूल प्रतियां न मिलने के मामले में डायट प्राचार्य ने जांच कराई। पता चला कि प्रयागराज के परीक्षा नियामक कार्यालय से ही नहीं आई हैं। उन्होंने मूल प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए नियामक कार्यालय के अधिकारी को पत्र भेजा है।
सर्वोच्च न्यायालय ने साल 2010 से पहले नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य की है। इसके लिए शिक्षकों को दो साल का समय दिया गया है। अब शिक्षकों को नियुक्ति से पहले लिए गए प्रशिक्षण की अंक तालिका की प्रति आवेदन में लगानी है। 18 दिसंबर से सीटेट (सीटीईटी) के लिए आवेदन शुरू होंगे। शिक्षकों ने डायट से अंकपत्र की मूलप्रति मांगी तो वहां मिली ही नहीं। जांच में पता चला कि साल 1999, 2004 और साल 2007 और 2008 में प्रशिक्षण लेने वाले करीब 1900 शिक्षकों के अंकपत्र ही नहीं हैं।
मामला डायट प्राचार्या तक पहुंचा तो उन्हाेंने पटल सहायकों से उसकी तलाश कराई तो पता चला कि इन सत्राें की मूल प्रतियां प्रयागराज स्थित परीक्षा नियामक प्राधिकारी प्रयागराज से ही नहीं आई हैं। इस पर उन्होंनें मूल प्रतियां भेजने के लिए वहां पत्र भेजा है। उधर आवेदन की तिथि 18 दिसंबर नजदीक आने से शिक्षक भी परेशान हैं।
उधर उप्र जूनियर हाईस्कूल पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष कृष्णशंकर मिश्र की अगुवाई में शिक्षकों ने डायट प्राचार्या को ज्ञापन देकर अंकतालिकाएं मंगाने की मांग की है। ताकि शिक्षकों को आवेदन में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। ज्ञापन देने वालों में जिला महामंत्री अवनीश कुमार पाल, कोषाध्यक्ष दीपक वर्मा मौजूद रहे।

