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Saturday, February 28, 2026

एनसीईआरटी के प्रशस्ति 2.0 एप से विद्यालय के छात्र-छात्राओं की दिव्यांगता पहचानेंगे गुरुजी, मोबाइल पर करना है डाउनलोड

एनसीईआरटी के प्रशस्ति 2.0 एप से विद्यालय के छात्र-छात्राओं की दिव्यांगता पहचानेंगे गुरुजी, मोबाइल पर करना है डाउनलोड

प्रयागराज। एनसीईआरटी ने प्रशस्ति 2.0 एप (प्री असिसमेंट होलिस्टिक स्क्रीनिंग टूल) विकसित किया है। इसकी मदद से 21 प्रकार की दिव्यांगता की पहचान होगी। यह समग्र शिक्षा के तहत दिव्यांग छात्रों के त्वरित प्रमाणन और समावेशन को बढ़ावा देने के लिए रिपोर्ट तैयार करता है।


स्कूल शिक्षा महानिदेशक का निर्देश


स्कूल शिक्षा महानिदेशक के निर्देश पर परिषदीय स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, कक्षा अध्यापकों तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की वार्डन, कक्षा अध्यापकों व स्पेशल एजुकेटर्स, फिजियोथेरेपिस्ट को यह एप अपने मोबाइल पर डाउनलोड करना है। इसके लिए 28 फरवरी तक की समय सीमा निर्धारित की गई है। विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की स्क्रीनिंग नियमित रूप से करनी है। पूर्व में यदि शिक्षकों ने इस एप को डाउनलोड किया है तो उसे अनस्टाल कर फिर से डाउनलोड करना है।


प्रशस्ति एप से छात्र-छात्राओं की स्क्रीनिंग होगी 


नेशनल मेंटर शत्रुंजय शर्मा ने बताया कि स्कूल शिक्षा महानिदेशक की ओर से आए पत्र में कहा गया है कि प्रदेश में विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की प्रशस्ति एप से विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की स्क्रीनिंग की जाएगी। आरंभिक जांच सूची भाग-एक में अध्यापक व भाग-दो में स्पेशल एजुकेटर्स डाटा एंट्री करेंगे। परिषदीय विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों व स्पेशल एजुकेटर्स के उत्तर दायित्व निर्धारित किए गए हैं।


शिक्षक आधार या मोबाइल नंबर से पंजीयन कराएं


शिक्षकों को स्वयं के आधार या मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीयन कराना है। कक्षा का उल्लेख करते हुए स्क्रीनिंग किए हुए बच्चों का विवरण भरना होगा। इसमें जांच की पुष्टि करने और बच्चों की दिव्यांगताओं को प्रारंभिक रूप से वर्गीकृत किया जाएगा। छात्र-छात्राओं का दो सप्ताह तक विभिन्न परिस्थितियों में (विद्यालय, सामाजिक, व्यावहारिक व चलने-फिरने) का अवलोकन कर देखे गए व्यवहारों के अनुसार जांच सूची में सही विकल्प का चयन कर चिह्न लगाना होगा।


63 बिंदु के आधार पर दिव्यांगता तय होगी


जांच सूची में कुल 63 बिंदु हैं। इसी के आधार पर बच्चों की दिव्यांगता तय होगी। प्रत्येक दिव्यांगता के लिए अलग जांच सूची है। इसका उद्देश्य संभावित दिव्यांगताओं की पहचान करना है, जिससे कि बच्चों को आगे के मूल्यांकन और प्रमाणन शिविरों के जरिए सहयोग मिल सके

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