वित्तमंत्री ने चेताया, बैंक गलत तरीके से बीमा पॉलिसी न बेचें
● राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन : टोल-फ्री नंबर 1915 या 1800-11-4000 पर कॉल करें।
● ई-दाखिल पोर्टल: ऑनलाइन उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के लिए।
● बीमा मिस-सेलिंग: बीमा कंपनी की शिकायत निवारण सेल में, फिर बीमा लोकपाल या इरडा की वेबसाइट (155255 पर कॉल)।
● बैंकिंग मिस-सेलिंग: आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल के पास।
दिल्ली, । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों द्वारा गलत जानकारी के साथ बेची जा रही बीमा पॉलिसी व अन्य उत्पादों पर कड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि बैंकों का मूल कार्य जमा (धनराशि) जुटाने और ऋण देने है और बैंक उसी पर ध्यान केंद्रित करें।
सोमवार को बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक जरूरत न होने के बावजूद भी ग्राहकों को बीमा बेचने में अधिक समय लगा रहे हैं जबकि उनका मुख्य कार्य बैंकिंग सेवाएं देना है।
उन्होंने कहा कि मिस-सेलिंग लंबे समय से चिंता का विषय रही है और अब इस पर सख्ती जरूरी है। कई मामलों में ग्राहकों के पास पहले से बीमा पॉलिसी होती है लेकिन उसके बावजूद बैंक उन पर नई बीमा पॉलिसी लेने का दबाव बनाते हैं। खासकर होम लोन लेते समय ग्राहकों से अतिरिक्त बीमा लेने को कहा जाता है, जबकि संपत्ति पहले से ही गिरवी होती है। ऐसे में नियामक की जिम्मेदारी स्पष्ट न होने के कारण ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि बैंकों को ग्राहकों की जरूरत समझने, जमा बढ़ाने और जिम्मेदारी के साथ ऋण देने पर ध्यान देना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली को अधिक मानवीय और ग्राहक-केंद्रित बनाने की आवश्यकता है। मौजूदा समय में बैंकों ने ग्राहकों के साथ संबंध मजबूत करने और उनकी वित्तीय जरूरतों को समझने की मूल कार्य दूरी बना ली है, जिससे ग्राहकों में असंतोष बढ़ा है।
अमेरिकी टैरिफ मामले में टिप्पणी करना फिलहाल जल्दबाजी
केंद्रीय मंत्री ने अमेरिकी टैरिफ के मुद्दे पर कहा कि टैरिफ के चलते क्या प्रभाव होगा, इस पर किसी भी तरह की टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय पूरे मामले को देख रहा है और प्रतिनिधिमंडल तय करेगा कि आगे की बातचीत कैसे आगे बढ़ेगी और कब अमेरिका जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मलासीतारमण ने सोमवार को कहा सरकार के पास सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय की कोई रूपरेखा नहीं है। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में प्रस्तावित विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर एक उच्च-स्तरीय समिति इस विषयापर गौर करेगी। जो समिति बनाई जा रही है, वह भारतीय बैंकिंग को मजबूत बनाने के हर पहलू पर ध्यान देंगी।
सोना-चांदी पर नजर
वित्त मंत्री ने कहा कि सोने की कीमत इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। भारत में पारंपरिक रूप से त्योहारों और शादी के सीजन में सोने-चांदी की मांग बढ़ती है, लेकिन मौजूदा आयात स्तर से अर्थव्यवस्था पर तत्काल कोई बड़ा मैक्रोइकॉनॉमिक दबाव नहीं है। सरकार व आरबीआई सोना-चांदी के आयात और कीमतों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

