Primary Ka Master Latest Updates👇

Friday, February 20, 2026

परिषदीय विद्यालयों में बंटने आई किताबें कबाड़ी को बेचने पर दो बर्खास्त, दो निलंबित

परिषदीय विद्यालयों में बंटने आई किताबें कबाड़ी को बेचने पर दो बर्खास्त, दो निलंबित


परिषदीय विद्यालयों में छात्रों को बांटने के लिए आई सरकारी किताबों को कबाड़ी के हाथ बेचने का गंभीर मामला सामने आया है। शुरुआती जांच के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए दो लोगों की सेवा समाप्त कर दी है, जबकि दो अन्य कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। यह कदम एक तरह से विभाग का official announcement भी माना जा रहा है, जिसमें स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सरकारी संपत्ति के साथ किसी भी तरह की लापरवाही या हेराफेरी बर्दाश्त नहीं होगी।


चार रुपये किलो में बेची गईं सरकारी किताबें


जानकारी के मुताबिक, किताबों की खेप को महज चार रुपये प्रति किलो के हिसाब से कबाड़ में बेचा गया। सोचिए, जिन किताबों से बच्चों का भविष्य संवरना था, वे वजन के भाव बिक रही थीं। यह मामला 17 फरवरी को तब उजागर हुआ जब अक्षय त्रिपाठी को सूचना मिली कि एक स्थानीय कबाड़ कारोबारी सरकारी किताबों से भरा ट्रक जिले से बाहर भेज रहा है।


प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम को अलर्ट किया। ट्रक को पड़ोसी जिले की सीमा पर रोका गया और वापस बहराइच लाया गया। दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि किताबें उत्तराखंड के काशीपुर स्थित एक फर्म को भेजी जा रही थीं। ट्रक मुरादाबाद के एक ट्रांसपोर्टर का बताया गया है।


किन अधिकारियों पर गिरी गाज?


मामले में विभागीय जांच के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी आशीष कुमार सिंह ने कड़ी कार्रवाई की।


संविदा पर तैनात जिला समन्वयक (सामुदायिक सहभागिता) आशुतोष सिंह की सेवा समाप्त अनुदेशक अतुल कुमार सिंह की सेवा समाप्त विभागीय परिचारक शफीक अहमद निलंबित परिचारक आलोक कुमार निलंबित किया विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई official details के आधार पर की गई है और आगे भी जांच जारी रहेगी।


13,595 किताबें कम मिलीं


जिले के छह गोदामों में रखे स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच में कुल 13,595 किताबें कम पाई गईं। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि मामला छोटा नहीं, बल्कि व्यवस्थित तरीके से की गई गड़बड़ी का संकेत देता है।


रामगांव थाने में कबाड़ डीलर दिलशाद अहमद और ट्रक मालिक मोहम्मद असलम के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है।


प्रशासन की सख्त चेतावनी


जिलाधिकारी ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए प्रशासनिक समिति गठित करने की पुष्टि की है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि स्टॉक की निगरानी प्रक्रिया में कहां चूक हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-सी important guidelines लागू की जाएंगी।


सरकारी योजनाओं के तहत बच्चों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराना एक बड़ा government benefit है। ऐसे में अगर वही किताबें बाजार में कबाड़ के रूप में बिकने लगें, तो यह न सिर्फ वित्तीय नुकसान है बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।


आगे क्या?


फिलहाल पुलिस जांच जारी है और विभागीय स्तर पर भी पूरी पड़ताल की जा रही है। अगर किसी अन्य कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उस पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।


यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि सरकारी संसाधनों की सुरक्षा केवल नियमों से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की भावना से होती है। शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही ही सबसे बड़ी eligibility है — चाहे वह अधिकारी हो या कर्मचारी।


निष्कर्ष: बहराइच में सामने आया यह प्रकरण प्रशासन के लिए चेतावनी है। सख्त कार्रवाई से संदेश साफ है—सरकारी किताबें बच्चों के लिए हैं, कबाड़ के लिए नहीं। आने वाले दिनों में जांच की रिपोर्ट और official update स्थिति को और स्पष्ट करेगी।

परिषदीय विद्यालयों में बंटने आई किताबें कबाड़ी को बेचने पर दो बर्खास्त, दो निलंबित Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP UPDATEMART

Social media link