लखनऊ में साइबर ठगों ने रिटायर्ड कमिश्नर और शिक्षिका को बनाया शिकार, लगाई ₹1.94 करोड़ की चपत
साइबर थाना पुलिस ने दोनों मामलों में रिपोर्ट दर्ज कर ली है। इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। चिनहट के कृष्ण विहार कॉलोनी निवासी 75 वर्षीय अध्यापिका गीता कुमार ने बताया कि नवंबर 2025 में व्हाट्सएप पर मैसेज आया, जिसमें नाका सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड में निवेश करने पर मुनाफे की बात कही गई।
संपर्क करने पर जालसाज ने लिंक भेजकर रजिस्ट्रेशन कराया। पीड़िता ने बताया कि उपनगरीय क्षेत्रों में वंचित बच्चों के लिए एक स्कूल का विस्तार करने के उद्देश्य से निवेश के लिए हामी भर दी। जालसाजों ने कंपनी को यूके की बताया। इसके बाद कई केवाईसी फार्म व क्रेडिट एग्रीमेंट भेजे गए।
निवेश, टैक्स व निवेश का बीमा के नाम पर जालसाजों ने उकसाया। जाल में फंसाकर पीड़िता से दस नवंबर से 24 फरवरी तक 18 बार में 1.67 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए। मांग बढ़ने पर पीड़िता ने खाते में रुपये नहीं होने की बात कही तो आरोपितों ने कैश मांगा। इसपर गीता का माथा ठनका। पड़ताल की तो ठगी का पता चला।
उन्होंने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी है। वहीं, राजाजीपुरम सी-ब्लॉक निवासी वंदना सेंसिल ने बताया कि पिता राजेंद्र कुमार सेंसिल सेंट्रल एक्साइज में कमिश्नर पद से रिटायर्ड हैं। पिता की मैक्स लाइफ इंश्योरेंस में मल्टीपल इंश्योरेंस पॉलिसी थी। 13 जनवरी को पिता के मोबाइल पर एक कॉल आयी।
फोनकर्ता ने अपना परिचय जीबीआइसी डिपार्टमेंट से अतुल मेहरा बताया। कहा कि उनका विभाग सरकारी है, जो इंश्योरेंस से संबंधित ग्रीवेंस के समाधान का काम करता है। पिता ने पहले ऑनलाइन ग्रीवेंस अप्लाई किया था। लिहाजा बुजुर्ग राजेंद्र जाल में फंस गए।
जालसाज ने कहा कि आपकी मल्टीपल पॉलिसी की मैच्योरिटी 1.30 करोड़ है। क्लेम के लिए स्टांप ड्यूटी, सर्विस चार्ज समेत तमाम मदों के नाम पर 26 लाख रुपये ऐंठ लिए।
पीड़िता ने बताया कि पिता ने अपने एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी, एक्सिस बैंक और भाई वरदान के बैंक आफ बड़ौदा खाते से दिए थे। ठगी का एहसास होने पर राजेंद्र की तबीयत खराब हो गई। पीड़िता वंदना ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

