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Friday, March 13, 2026

कुत्तों के आतंक से कई बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ा,ग्रामीण कर रहे पहरेदारी

कुत्तों के आतंक से कई बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ा,ग्रामीण कर रहे पहरेदारी

रहीमाबाद। रहीमाबाद इलाके और तरौना गांव में डेढ़ हफ्ते में कुत्तों के हमले से बच्ची समेत दो की मौत और चार के घायल होने की घटना से ग्रामीण दहशत में हैं। बच्चों को ग्रामीण घरों के अंदर कैद किए हैं। उन्हें बाहर खेलने नहीं निकलने दे रहे हैं। कई बच्चों ने स्कूल जाना बंद कर दिया है। जिलाप्रशासन और वन विभाग द्वारा कार्रवाई न होने पर ग्रामीणों ने खुद लाठी उठा ली। गुरुवार को 15-20 ग्रामीणों ने चार घंटे बबूल के जंगल में आदमखोर कुत्तों के लिए कांबिंग की। ग्रामीण घरों के बाहर लाठी लेकर पहरा दे रहे हैं।


तरौना गांव में गुरुवार सुबह से ही ग्रामीण दिलीप, जाफर और भरोसे घर के बाहर लाठी लेकर खड़े थे। ग्रामीणों ने बच्चों को घर के अंदर कर दिया। उन्हें बाहर निकलने से मना कर दिया था। इस बीच दिलीप, बलराम, शमशाद, बबलू, रामचंद्र, सुरेश और श्रीकृष्ण समेत 15 ग्रामीण लाठियां लेकर बबलू के जंगल और खेतों की तरफ निकले। आदमखोर कुत्तों की तलाश में जंगल में पहुंचे। ग्रामीणों की चहलकदमी देख कुत्तों का एक झुंड निकला और भागने लगा।


10 दिन में बच्ची और बछड़े को मार डाला, चार घायल


● 11 मार्च 2026 : रहीमाबाद तरौना गांव में लाठी लेकर दौड़े ग्रामीणों बच्ची को बचाया, कुत्तों के झुंड ने बछड़े को मार डाला


● 06 मार्च 2026 : रहीमाबाद गदिया खेड़ा गांव में कुत्तों के दौड़ाने से बाइक सवार राशिद घायल हुआ।


● 05 मार्च 2026 : रहीमाबाद भतोइया गांव में कुत्तों के दौड़ाने से बाइक सवार सोनू गिरा, घाय


कुत्तों के जबड़े से भाई को छुड़ा लाई बहने 


रहीमाबाद। गुरुवार को शिकारी कुत्तों ने मासूम बच्चे पर हमला कर दिया। बच्चे को गिराकर नोचने लगे। साथ गई बहनों ने कांटो की झाड़ उठाकर कुत्तों पर हमला कर दिया करीब 10 मिनट के संघर्ष के बाद बहने अपने छोटे भाई को कुत्तों के जबड़े से छुड़ा लाई। रहीमाबाद इलाके के कैथूलिया गांव निवासी मुंशीलाल का बेटा हरियांश 10 शौच के लिए गया था। तभी उस पर कुत्तों ने हमला बोल दिया। चीख पुकार सुनकर पास में मौजूद हरियांश की बहनें चांदनी और अमृता मौके पर पहुंच गईं।


देर होती चली जाती जान ग्रामीणों ने बताया कि बहनें समय पर हरियांश को बचाने न पहुंचती तो उसकी जान चली जाती। कुत्ते उसे नोच डालते।कुत्तों के जबड़े से भाई हरियांश को चांदनी और अमृता निकाल लाई।


हिम्मत को ग्रामीणों ने सराहा


चांदनी और अमृता के इस सराहनीय कार्य की पूरे गांव के ग्रामीणों ने प्रशंसा की है। ग्रामीणों का कहना है कि विषम परिस्थितियों में बड़े डर जाते हैं। दोनों बहनों की हिम्मत काबिले तारीफ है।

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