शिक्षकों की समस्याएं दिन ब दिन बढ़ती जा रही है एक से निपट रहे होते है तभी दूसरी आ जाती है। इन समस्याओं से निपटने में 4 मुख्य बाधाएं है।
1– समाज में एक साजिश के तहत नरेटिव बना दिया गया है कि शिक्षक पढ़ाते नहीं है, जो कि पूरी तरह गलत है, उस नरेटिव की वजह से जब शिक्षक अपनी समस्या से जूझता है तो उसे सामाजिक समर्थन नहीं मिलता जिस वजह से उसकी लड़ाई और मुश्किल हो जाती है।
2– शिक्षकों में एकजुटता की कमी, वैसे तो शिक्षक आपस में सभी से जुड़े रहते है पर जब बात संघर्ष की आती है तो टुकड़ों में बंट जाता है, एक समझदार वर्ग होने के कारण हो हर कार्य के जरूरत से ज्यादा तर्क वितर्क करने लगता है जिस कारण किसी भी मामले में आम सहमति नहीं बन पाती और कोई भी लड़ाई हो आपसी खींचतान की भेंट चढ़ जाती है।
3– मुद्दों के आधार पर मतभेद, वैसे तो होना ये चाहिए कि मुद्दा किसी ही शिक्षक का हो सभी को साथ देना चाहिए, किन्तु होता ये है कि जो प्रभावित होते हैं वो परेशान होते है और प्रयास करते है बाकी ज्यादातर उससे दूरी बना के रखते है या फिर व्हाट्सऐप तक समर्थन रखते है जमीन पर पीछे हट जाते है जिससे संघर्ष करने वालों की संख्या कम हो जाती है और लड़ाई कमजोर हो जाती है।
4– हर मुद्दे के लिए किसी मसीहा का इंतजार, हर शिक्षक चाहता है और बोलता है कि फला बात गलत है किन्तु कोई आगे आ कर उस पर कार्य नहीं करना चाहता वो चाहता है कि कोई संघ आगे आए कोई नेता आगे आए वो सब कर दें हमारे पास समय नहीं है, कोई भी धरना हो आंदोलन हो मुश्किल से 20% लोग प्रतिभाग करते है बाकी समय नहीं निकाल पाते जबकि वर्ष के 1 या 2 बार ऐसे मामलों के लिए समय निकल लेना चाहिए, भले ही उस मुद्दे से हम प्रभावित हो या न हों,कोई भी संघ हो व्यक्ति हो या समूह हो जब उसे लोगों का साथ मिलेगा तभी वो लड़ पाएगा।
किसी भी समस्या से लड़ने के लिए हमें उक्त समस्या से लड़ना होगा अगर हम इन 4 आंतरिक लड़ाई को जीत लें तो हर लड़ाई जीतना आसान होगा।
विशेष– TET के विरोध में आगामी 13 अप्रैल को हर जिले के जिला मुख्यालय पर मशाल जुलूस का अभियान है, भले ही आप tet पास हो पर अपने साथियों के सहयोग में मशाल जुलूस में जरूर प्रतिभाग करें।
आपका अनुज
विवेकानंद
संस्थापक एवं अध्यक्ष
TSCT एवं संस्थापक NSCT
राष्ट्रीय प्रभारी लीगल विंग एवं संयोजक
अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ

