देश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े बड़े मुद्दों के बीच अब शिक्षकों की छुट्टियों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सर्दियों की छुट्टियां पहले ही विभिन्न कार्यों में खर्च हो चुकी हैं, वहीं आगामी गर्मी की छुट्टियों पर भी जनगणना जैसे कार्यों का दबाव बनने की संभावना जताई जा रही है।
इसी बीच शिक्षकों के एक वर्ग ने छुट्टियों की वर्तमान व्यवस्था में बदलाव की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पारंपरिक लंबी छुट्टियों के बजाय Earned Leave (EL) की व्यवस्था लागू की जाए और गैर-शैक्षणिक कार्य जैसे ट्रेनिंग, सर्वे आदि इन्हीं अवकाश के दौरान कराए जाएं।
मांग करने वालों का तर्क है कि इससे शिक्षकों पर लगने वाला “लंबी छुट्टियों” का कलंक भी खत्म होगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार भी होगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि इस मुद्दे पर समय रहते आवाज नहीं उठाई गई, तो भविष्य में और नए कार्यों का बोझ बढ़ता रहेगा।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटते, लेकिन कार्य और अवकाश के संतुलन को लेकर अब ठोस नीति की जरूरत है।
