शिक्षकों के अवकाश आवेदन समय पर निपटाने में भारी लापरवाही, सिर्फ 7.71% मामलों का समयबद्ध निस्तारण
हरदोई। प्रदेश में शिक्षकों के अवकाश आवेदनों के निस्तारण को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई के उद्देश्य से शुरू की गई ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद अधिकांश आवेदन समय सीमा के भीतर निपटाए नहीं जा रहे हैं। सीएम डैशबोर्ड के आंकड़े विभागीय सुस्ती और लापरवाही की गवाही दे रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, फरवरी माह में प्रदेशभर के 6,09,645 शिक्षकों ने अवकाश के लिए आवेदन किया। इनमें से 4,86,067 आवेदन स्वीकृत किए गए, लेकिन केवल 46,976 आवेदन ही तय समय सीमा के भीतर निस्तारित हो सके। यह कुल का मात्र 7.71 प्रतिशत है, जो व्यवस्था की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि 4,39,091 आवेदन समय सीमा के भीतर निपटाए नहीं जा सके, जिससे शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिला स्तर पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। लखनऊ 8.94 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर है, जबकि अमेठी 3.53 प्रतिशत के साथ सबसे नीचे है। बहराइच (7.88%), गोंडा (6.88%), बाराबंकी (6.58%), सीतापुर (6.10%), हरदोई (5.86%), लखीमपुर खीरी (5.79%), रायबरेली (5.73%), अयोध्या (5.35%) और सुलतानपुर (5.30%) जैसे जिलों में भी प्रदर्शन कमजोर रहा।
दरअसल, परिषद विद्यालयों में अवकाश प्रबंधन को सरल और जवाबदेह बनाने के लिए मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था लागू की गई थी। नियमों के अनुसार, आकस्मिक, मातृत्व, अर्जित और चिकित्सीय अवकाश समेत सभी प्रकार के आवेदन निर्धारित समय सीमा में निपटाना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि सभी जिलों को समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जिन स्थानों पर खामियां सामने आई हैं, उन्हें जल्द दूर करने की बात कही गई है।
👉 निष्कर्ष:
शिक्षकों के अवकाश जैसे महत्वपूर्ण मामलों में इस तरह की देरी न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि शिक्षकों के मनोबल और कार्यक्षमता को भी प्रभावित करती है। अब देखना होगा कि विभाग इस दिशा में कितनी तेजी से सुधार करता है।

