शिक्षक भी इंसान हैं, शिक्षकों के लिए अमानवीय आदेश न निकालें अधिकारी।✍️ एक शिक्षक की कलम से
आज मैं यह वीडियो देख रहा था जिसे देखकर कुछ बातें मेरे मन में आईं। एक तरफ कुछ प्रशासनिक अधिकारी गर्मी लू के चलते सचेत रहने के लिए आदेश जारी कर रहे हैं व कई जिलों के अधिकारियों ने भी आदेश जारी किया था कि भीषण गर्मी से बचाव के लिए विद्यालय समय सुबह 7:30 से 12:30 तक का रहेगा परन्तु शिक्षा निदेशक लखनऊ द्वारा अमानवीय आदेश जारी हो गया कि बच्चों की पढ़ाई के लिए तो 7:30 से 12:30 तक विद्यालय खुलेगा परन्तु शिक्षक/शिक्षामित्र/अनुदेशक एक घण्टा अतिरिक्त विद्यालय में 1:30 बजे तक रुकेंगे और शैक्षणिक/प्रशासकीय एवं अन्य कार्यों को पूर्ण करेंगे। इसी आदेश का पालन करते हुए बाँदा बीएसए ने भी आदेश जारी कर दिया कि 1:30 बजे तक शिक्षक विद्यालय में रहेंगे।
मेरा प्रश्न यह है कि जब बच्चों की छुट्टी 12:30 बजे हो जानी है तो इस भीषण जानलेवा गर्मी में शिक्षक एक घण्टा विद्यालय में अतिरिक्त बैठकर क्या दीवारों को शैक्षणिक कार्य कराएंगे और उनके पास कौन से अन्य प्रशासनिक कार्य हैं जो वे विद्यालय में 12:30 से 1:30 के बीच में बैठकर एक घण्टे में पूरे कर लिये जायेंगे या कोई अन्य कार्य बता दीजिए कि बच्चों की छुट्टी होने के बाद शिक्षक विद्यालय में रुककर गर्मी में काम करेंगें। जीवन में मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। अमानवीय व अव्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने से मानवता शर्मसार होती है। शिक्षकों के अंदर भी जान होती है, शिक्षक भी हम सभी के बीच इसी समाज/परिवेश/वातावरण से आए हुए हैं। उनके भी घर-परिवार बच्चे हैं जो उनके सकुशल जीवित वापस घर लौटने की राह देखते रहते हैं। उनकी जान की रक्षा करना भी हम सबका कर्तव्य है। एक दूसरा प्रश्न यह भी है कि ऐसी क्या जल्दी पड़ी है कि इस मई-जून की भीषण जानलेवा गर्मी में ही आप कर्मचारियों से मकान की गणना/जनगणना करायेंगे। ए सी रूम में बैठकर प्लान बनाना और आदेश जारी करना उच्च अधिकारियों के लिए तो आरामदायक हो सकता है लेकिन भीषण गर्मी में गांव/शहर की गलियों और सड़कों पर गर्मी, धूप, लू में कार्य करना किसी युद्ध लड़ने से कम नहीं।
कृपया जियो और जीने दो 🙏


