उर्दू की जगह अन्य विषय पढ़वाने पर कार्रवाई : डीईओ
शिक्षा विभाग के सभी कार्यालयों के साथ ही सभी स्कूलों में राष्ट्रभाषा हिंदी के साथ ही द्वितीय राजभाषा उर्दू के प्रयोग को सुनिश्चित किया जाएगा। यही नहीं, स्कूलों में नियुक्त उर्दू शिक्षकों से उर्दू विषय नहीं पढ़वा कर दूसरे विषय की पढ़ाई करवाई जाएगी तो विभागीय कार्यवाही की जाएगी। यह निर्देश गुरुवार को देश के प्रथम शिक्षा मंत्री भारतरत्न मौलाना अबुल कलाम आजाद जयंती पर आयोजित सेमिनार में डीईओ अब्दुस्समद ने दिया।
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर आबेदा हाईस्कूल में कौमी असातीजाह तंजीम की ओर से सेमिनार और कवि गोष्ठी के साथ ही सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उर्दू की बेहतरी को लेकर कई प्रस्ताव भी पारित किए गए, जिस पर डीईओ ने
मुहर लगाई। बच्चों को उर्दू से जोड़ने की जरूरत: मुख्य अतिथि सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मो. इर्शादुल्लाह ने कहा कि उर्दू हमारी जुबान है, लेकिन हम उर्दू से
महरूम होते जा रहे हैं। बच्चे अपने विषय के रूप में इसे नहीं लेते हैं। स्कूलों में में मातृभाषा मातृभाषा के के साथ ही उर्दू विषय से भी बच्चों को जोड़ने की जरूरत है और इसके लिए शिक्षा अधिकारियों को आगे आना होगा। मौके पर बीपीएससी में सफल छात्रों को सम्मानित किया गया। डीईओ अब्दुस्सलाम अंसारी को मौलाना अबुल कलाम सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मिडिल स्कूल सफुद्दीनपुर की पूर्व प्राचार्य हुरमत बानो के साथ ही अन्य लोगों को भी सम्मानित किया गया।
सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं होता
बीपीएससी सदस्य इम्तियाज अहमद करीमी ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं होता। मेहनत और लगन से ही कामयाबी संभव है। मौके पर डा. अबुजर कमालुद्दीन ने कहा कि छात्रों की सफलता मौलाना अबुल कलाम आजाद के सपनों को यर्थाथ में बदल रही है।
डीईओ ने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माता मौलाना आजाद कौमी एकता के लिए हमेशा काम करते रहे।

