53 निजी विश्वविद्यालयों में सिर्फ छह अनुदान योग्य
लखनऊ :** प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन गुणवत्ता के पैमाने पर अधिकांश संस्थान अभी पीछे हैं। प्रदेश के 53 निजी विश्वविद्यालयों में सिर्फ छह को ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम की धारा 12बी के तहत पत्र मिल सका है। इनमें तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी मुरादाबाद, आईआईएमटी यूनिवर्सिटी मेरठ, इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ, द ग्लोकल यूनिवर्सिटी सहारनपुर, जीएलए यूनिवर्सिटी मथुरा और गलगोटिया यूनिवर्सिटी गौतमबुद्धनगर शामिल हैं। यह वही दर्जा है, जिसके आधार पर संस्थान को यूजीसी, शिक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार से विकास अनुदान, रिसर्च फंड और कई शैक्षणिक योजनाओं का लाभ मिलता है। कई संस्थानों ने अभी तक इसके लिए आवेदन भी नहीं किया है जबकि सात विश्वविद्यालयों के आवेदन यूजीसी में लंबित हैं।
* छह निजी विश्वविद्यालयों को यूजीसी से धारा 12बी का पत्र
* पत्र के बिना संस्थान को नहीं मिल पाती है केंद्रीय सहायता
यूजीसी अधिनियम की धारा 12बी के अंतर्गत जारी पत्र को संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध क्षमता और आधारभूत ढांचे का भी प्रमाण माना जाता है। इस पत्र के बिना विश्वविद्यालयों को बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट, आधुनिक लैब, लाइब्रेरी, छात्रावास और नए शैक्षणिक ढांचे के विकास के लिए केंद्रीय सहायता नहीं मिल पाती है। इसका सीधा असर छात्रों और शिक्षकों दोनों पर पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार धारा 12बी का दर्जा मिलने से छात्रों को यूजीसी की कई महत्वपूर्ण फेलोशिप और छात्रवृत्तियों का लाभ मिलता है। वहीं प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं को रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध हो पाती है। इसके अलावा नैक ग्रेडिंग और एनआईआरएफ रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन के लिए भी यह दर्जा बेहद अहम माना जाता है।
धारा 12बी का पत्र पाने के लिए विश्वविद्यालय में पर्याप्त संख्या में नेट या पीएचडी योग्य स्थायी शिक्षक, मजबूत शैक्षणिक ढांचा, हाईटेक लैब, कंप्यूटर सेंटर, लाइब्रेरी और अन्य आधारभूत सुविधाएं होना जरूरी है। सबसे पहले विश्वविद्यालय को यूजीसी की धारा 2(एफ) के तहत मान्यता मिलती है। इसके बाद संस्थान धारा 12बी के लिए आवेदन करता है। इसके बाद यूजीसी की विशेषज्ञ समिति कैंपस का निरीक्षण करती है। सकारात्मक रिपोर्ट मिलने पर पत्र जारी किया जाता है।

