परिषदीय स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए होगा क्षेत्रवार मूल्यांकन, कक्षावार आकलन पर रहेगा जोर
लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने और प्रदेश को राष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर स्थान दिलाने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) नई रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत विद्यालयों को छोटे-छोटे पॉकेट (क्षेत्र) में बांटकर वहां की शैक्षणिक स्थिति का मूल्यांकन कराया जाएगा।
प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की निपुण मूल्यांकन में स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर हुए परख मूल्यांकन में भी कक्षा तीन और छह के छात्रों की स्थिति संतोषजनक पाई गई है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी सुधार की काफी गुंजाइश बनी हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग और एससीईआरटी ने नई कार्ययोजना तैयार की है।
विभाग का प्रयास है कि निपुण मूल्यांकन की तर्ज पर विद्यालयों में व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाए। इसके लिए एससीईआरटी की ओर से स्कूलों को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटकर वहां की पढ़ाई की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही ओवरऑल आकलन के साथ कक्षावार मूल्यांकन को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
एससीईआरटी का मानना है कि विद्यालयों को छोटे-छोटे पॉकेट में बांटने से काफी महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकेंगी। इससे यह पता चल सकेगा कि किन जिलों और क्षेत्रों में पढ़ाई का स्तर कमजोर है और कहां सुधार की आवश्यकता अधिक है। नई व्यवस्था से न केवल सुधार की प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के परख मूल्यांकन की तैयारी भी बेहतर ढंग से हो सकेगी।
संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने बताया कि इस नई रणनीति से विद्यालयों के शैक्षणिक स्तर को मजबूत करने में मदद मिलेगी और बच्चों की सीखने की क्षमता में सुधार आएगा।

